प्रदूषण पर तीखा हमला
दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में बुधवार को आम आदमी पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा को जमकर घेरा।
- उन्होंने कहा कि आज हर दिल्लीवासी 15 सिगरेट के बराबर धुआं अपने फेफड़ों में लेने को मजबूर है।
- भाजपा सरकार प्रदूषण पर ठोस कदम उठाने के बजाय मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पानी का छिड़काव कर रही है ताकि AQI कम दिखे।
- नारंग ने आरोप लगाया कि भाजपा की चार इंजन वाली सरकार—केंद्र, दिल्ली, एमसीडी और उपराज्यपाल—पूरी तरह फेल साबित हुई है।

टोल प्लाजा और जाम का मुद्दा
नारंग ने सुझाव दिया कि रजोकरी, टिकरी, गाजीपुर और कालिंदी कुंज बॉर्डर पर लगने वाले लंबे जाम को खत्म करने के लिए टोल प्लाजा खोल दिए जाएं।
- उनका कहना था कि इन जामों से वाहनों का प्रदूषण कई गुना बढ़ रहा है।
- भाजपा सरकार के पास जनता को राहत देने की कोई ठोस योजना नहीं है।
आयुष विभाग में भर्ती विवाद
बैठक में नारंग ने एमसीडी के आयुष विभाग में भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।
- भाजपा ‘जेम पोर्टल’ के माध्यम से पैरामेडिक्स और पंचकर्म स्टाफ की भर्ती करने जा रही है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि इस भर्ती में फर्जी डिग्रियां, भाई-भतीजावाद और पैसों का लेनदेन शामिल है।
- आम आदमी पार्टी की मांग है कि भर्ती डीएसएसएसबी बोर्ड के माध्यम से हो ताकि जनता की जिंदगी खतरे में न पड़े।
सफाई कर्मचारियों और भ्रष्टाचार पर हमला
नारंग ने कहा कि जिन कर्मचारियों को पक्का करने के पत्र दिए गए हैं, उन्हें न तो पोस्टिंग मिली है और न ही वेतन।
- 1996-97 के कर्मचारी अब भी पक्के नहीं किए गए।
- उन्होंने आरोप लगाया कि सेवानिवृत्ति लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को एमसीडी अधिकारियों को 30% कमीशन देना पड़ता है।
- नारंग ने दावा किया कि उनके पास इसके सबूत मौजूद हैं।
सुरक्षा मानकों पर चिंता
गोवा नाइट क्लब अग्निकांड का जिक्र करते हुए नारंग ने कहा कि दिल्ली में भी कई रेस्टोरेंट बिना वैध एनओसी और सुरक्षा मानकों के चल रहे हैं।
- उन्होंने चेतावनी दी कि यह कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।
- उन्होंने इस पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
शिक्षा विभाग में तबादले और एमटीएस कर्मचारियों का मुद्दा
नारंग ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में पर्ची सिस्टम से तबादले हो रहे हैं।
- कैंसर पीड़ित और दिव्यांग समेत 25 कर्मचारियों का जबरन तबादला कर दिया गया।
- एमटीएस कर्मचारियों का वेतन और छुट्टियां काटी जा रही हैं, जबकि वे 33 दिन की हड़ताल के बाद काम पर लौटे हैं।
—ख़बर यहीं तक
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