राजधानी दिल्ली में प्रदूषण और सांसों के आपातकाल के बीच एमसीडी का ताज़ा आदेश चौंकाने वाला है। पढ़-लिखकर इंजीनियर बने लोग, जिनसे उम्मीद थी कि वे वर्क प्रोजेक्ट्स और तकनीकी काम संभालेंगे, अब लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर की भूमिका निभाएंगे। यानी इंजीनियर अब देखेंगे कि उनके इलाके में रेहड़ियां और अतिक्रमण तो नहीं हो रहा है। जब शहर प्रदूषण, ट्रैफिक और अतिक्रमण से जूझ रहा है, तो इंजीनियरों को रेहड़ी-पटरी हटाने में क्यों लगाया जा रहा है? क्या यह मानव संसाधन का गलत इस्तेमाल नहीं है?
आदेश जिसने सबको चौंकाया
22 दिसंबर को जारी आदेश के तहत मेंटेनेंस डिपार्टमेंट के जूनियर इंजीनियर और बेलदार का ट्रांसफर हुआ।
- मयंक तोमर, जो मेंटेनेंस वन डिविजन में जूनियर इंजीनियर थे, अब जनरल ब्रांच में लाइसेंसिंग इंस्पेक्टर बना दिए गए।
- दूसरे जूनियर राजेंद्र कुमार, को भी यही जिम्मेदारी सौंप दी गई।
यह फैसला न सिर्फ कर्मचारियों को हैरान कर रहा है, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या एमसीडी में इंजीनियरों की कमी हो गई है या फिर यह सेलरी संकट का नया रूप है।
- क्या इंजीनियरों की पढ़ाई और विशेषज्ञता अब रेहड़ियां हटाने में लगाई जाएगी?
- क्या एमसीडी में प्रबंधन और योजना का संकट इतना गहरा है कि तकनीकी स्टाफ को प्रशासनिक काम में झोंक दिया जा रहा है?
—ख़बर यहीं तक

