दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना मैया के आईटीओ घाट पर आज मौनी अमावस्या के शुभ अवसर पर भव्य आरती का आयोजन हुआ। दीपशिखाओं की लौ और मंत्रोच्चार की गूंज ने वातावरण को दिव्यता से भर दिया। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि हमारी संस्कृति, परम्परा और प्रकृति के प्रति सामूहिक समर्पण का प्रतीक बन गया। मौनी अमावस्या पर यमुना आरती ने यह संदेश दिया कि सांस्कृतिक परम्परा और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।
स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन सत्या शर्मा ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर यमुना मैया की आरती की और सद्भाव, शांति तथा जन-कल्याण की कामना की।

आरती के दौरान उठती ज्योतियों के बीच एक संकल्प बार-बार उभरता रहा—यमुना को अविरल और स्वच्छ बनाना, और दिल्ली को प्रदूषण मुक्त दिशा में आगे ले जाना।
संकल्प और संदेश
- यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान और जीवनरेखा है।
- इसे स्वच्छ रखना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
- जन-सहभागिता, जागरूकता और निरंतर प्रयासों से ही यमुना को पुनर्जीवन दिया जा सकता है।
वृक्षारोपण और पर्यावरणीय पहल
आरती के बाद श्रद्धालुओं ने वृक्षारोपण कर यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त रखने का संकल्प लिया।
- एक पौधा लगाना केवल पर्यावरण संरक्षण का कार्य नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन का बीज है।
- यह छोटा-सा कदम आने वाले बड़े बदलावों की नींव रखता है।
–ख़बर यहीं तक

