स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के 19 मई 2026 को आए आदेश का स्वागत किया और कहा कि दिल्ली नगर निगम पहले से ही आवारा कुत्तों की समस्या के स्थायी समाधान के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि निगम बजट में इस दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई थीं और कोर्ट के निर्देशों के बाद उन योजनाओं पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया है।
हर जोन में बनेगा डॉग शेल्टर
सत्या शर्मा ने कहा कि निगम का यह प्रयास है कि हर जोन में कम से कम एक डॉग शेल्टर स्थापित किया जाए, ताकि आवारा कुत्तों को सुरक्षित आश्रय, इलाज और देखभाल मिल सके। इसके लिए बजट में 10 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि द्वारका में डॉग शेल्टर बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है और अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह की सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
बंध्याकरण अभियान को किया जा रहा मजबूत
उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों के बंध्याकरण और रेबीज-रोधी टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूत करने के लिए पांच नए केंद्रों पर अतिरिक्त डॉग कैनल स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा मौजूदा पांच नसबंदी केंद्रों पर भी अतिरिक्त डॉग कैनल बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिससे प्रतिदिन अधिक संख्या में कुत्तों की नसबंदी की जा सकेगी।
रेबीज नियंत्रण के लिए विशेष अभियान
सत्या शर्मा ने कहा कि रेबीज जैसी घातक बीमारी पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के लिए बड़े स्तर पर मास एंटी रेबीज वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा। इसके साथ ही आवारा कुत्तों में माइक्रोचिप लगाने की योजना भी प्रस्तावित है, ताकि उनकी सटीक गणना, टीकाकरण रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सक
750 स्थानों पर बनाए गए फीडिंग पॉइंट
उन्होंने बताया कि आवारा कुत्तों के लिए फीडिंग पॉइंट बनाने का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। अब तक करीब 750 स्थानों पर फीडिंग पॉइंट विकसित किए जा चुके हैं। इसके अलावा निगम के नसबंदी केंद्रों में प्रतिदिन नियमित रूप से बंध्याकरण का कार्य जारी है और अब इस अभियान को और तेज किया जाएगा।
कोर्ट के आदेश के बाद और तेज हुआ काम
सत्या शर्मा ने कहा कि गत वर्ष नवंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद से एमसीडी ने आवारा कुत्तों के संरक्षण, उपचार और नियंत्रण से जुड़े सभी कार्यों को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि निगम का उद्देश्य जन सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करना है, ताकि लोगों को राहत मिले और पशुओं की देखभाल भी सुनिश्चित हो सके।

