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एमसीडी के शिक्षा विभाग में सीनियरिटी लिस्ट और प्रमोशन लिस्ट में गड़बड़ी बता मेयर से जवाब मांगा

नेता विपक्ष अंकुश नारंग ने एमसीडी शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षकों की वरिष्ठता सूची और पदोन्नति सूची दोनों में गड़बड़ी है। बीजेपी की एमसीडी ने प्रमोशन और वरिष्ठता सूची कैसे बनाई? इन्होंने सिर्फ भ्रष्टाचार करने और अपने लोगों को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षकों के साथ धोखा किया। अगर मेयर राजा इकबाल सिंह या शिक्षा विभाग इसका जवाब दे सकें, तो बिल्कुल दें। सीनियरिटी लिस्ट और प्रमोशन लिस्ट देखकर साफ है कि भाजपा और एमसीडी का शिक्षा विभाग मिलकर भ्रष्टाचार कर रहा है।

अंकुश नारंग ने कहा कि के प्रिंसिपल पदों पर पदोन्नति में आरक्षण नियमों की अनदेखी हुई। टीचर्स एसोसिएशन का आरोप है कि वरिष्ठ सूची में शामिल टीचर रुचिका की जॉइनिंग मार्च 1998 की है। जबकि सुनीता की जॉइनिंग फरवरी 1997 की है। दोनों एक ही कैटेगरी की हैं, लेकिन वरिष्ठता सूची में एक साल पहले जॉइन करने वाली टीचर को नीचे और बाद में जॉइन करने वाली टीचर को ऊपर रखा गया है। मेरिट रैंक के आधार पर तैनाती भी मान लें तो डीएसएसबी बोर्ड मेरिट बनाता है। डीएसएसबी की स्थापना ही 1999 में हुई। जबकि वरिष्ठता सूची 1995 से 2002 तक की है। 1995 से 2000 तक मेरिट कैसे बनी? डीएसएसबी की पहली वैकेंसी वर्ष 2000 में निकली और पहली नियुक्ति 2001 में हुई। ऐसे में एमसीडी का शिक्षा विभाग डीएसएसबी की 2001 के बाद की मेरिट को मान लिया होगा, लेकिन 1995 से 2001 तक की रैंक कैसे तय हुई?

एमसीडी की आधिकारिक प्रमोशन लिस्ट में पहला व्यक्ति कौन है, उसका नाम ही नहीं है। सिर्फ लिखा है कि 30 जून 2025 को रिटायर हुआ है। इसी तरह 10वां और 11वां नंबर में भी किसी का नाम नहीं है। यह सभी लोग एससी हैं। वरिष्ठता नंबर भी नहीं है। कैसे कोई सत्यापित करेगा कि वह वरिष्ठ है या नहीं है। मसलन, 18,517 नंबर पर हरि मोहन मीणा (एसटी) हैं। 18,518 पर चंद्रपाल सिंह और 18,519 पर जगदीश सिंह हैं। सीनियरिटी लिस्ट में 18,517 सीनियर है, लेकिन प्रमोशन लिस्ट में 18,518 और 18,519 को प्रमोट किया गया, 18,517 को नहीं। एमसीडी की सीनियरिटी लिस्ट के आधार पर प्रमोशन लिस्ट बनाई, तो हरि मोहन मीणा का नाम ऊपर क्यों नहीं आया? यह दलित और आदिवासी विरोधी रवैया है।

भारत लाल मीणा का नंबर 18,539 है, जो 9 जनवरी 1997 को जॉइन किए थे। श्यामलाल मीणा, जिनकी जॉइनिंग 9 अप्रैल 1997 थी, दोनों एक ही कैटेगरी में हैं। प्रमोशन का क्राइटेरिया एक समान होता है। 9 जनवरी 1997 को जॉइन करने वाले भारत लाल मीणा को सीनियर होना चाहिए था, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया और 9 अप्रैल 1997 वाले को प्रमोट कर दिया गया। एक 18,564 नंबर पर विजय सिंह, जो फिजिकली हैंडीकैप्ड और एससी हैं, उनकी जॉइनिंग 16 जनवरी 1997 थी। उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि 18,152 नंबर वाले कपिल, जिनकी जॉइनिंग 10 अक्टूबर 1997 थी, उनको प्रमोट किया गया।

डीओपीटी के नियम के मुताबिक, अगर जॉइनिंग में 6 महीने से ज्यादा गैप है, तो बाद वाला हमेशा जूनियर माना जाता है। लेकिन एक साल के गैप वाले को ऊपर कर दिया गया। डीओपीटी नियमों की भी अनदेखी की गई। एक अन्य टीचर पुष्पा की जॉइनिंग एक जनवरी 1998 है। वहीं, कृष्ण कुमार की जॉइनिंग 8 जनवरी 1997 है। बीजेपी की एमसीडी ने वरिष्ठता सूची में कृष्ण कुमार का नाम पुष्पा के बाद रखा। बीजेपी ने एससी टीचरों के अधिकार छीने गए।

नारंग ने कहा कि दलित विरोधी बीजेपी एमसीडी के शिक्षा विभाग में तैनात दलित शिक्षकों का हक मार रही है। बीजेपी और एमसीडी का शिक्षा विभाग दलित शिक्षकों को प्रमोशन में बराबरी का अवसर नहीं दे रहा है। टीचर्स एसोसिएशन ने इसकी शिकायत एससी/एसटी आयोग से की है और कहा है कि प्रमोशन में आरक्षण के नियमों की अनदेखी की जा रही है। अंकुश नारंग ने कहा कि बीजेपी और एमसीडी का शिक्षा विभाग मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं और सिर्फ अपने लोगों को आगे बढ़ा रहे हैं। मेयर राजा इकबाल सिंह को बताना चाहिए कि एमसीडी ने टीचरों की वरिष्ठता और पदोन्नति सूची कैसे बनाई और दोनों में गड़बड़ी क्यों है?

अंकुश नारंग ने कहा कि बीजेपी और एमसीडी का शिक्षा विभाग मिल कर भ्रष्टाचार कर रहा है। बीजेपी शासित एमसीडी की शिक्षा विभाग ने वरिष्ठता सूची निकाली थी और अब प्रमोशन लिस्ट भी निकाल दी है। जब वरिष्ठता सूची ही सही नहीं थी तो प्रमोशन की लिस्ट कैसे सही हो सकती है। भाजपा दलित विरोधी है। वह सफाई कर्मचारियों के अधिकारों का हनन कर रही है। अब बीजेपी शिक्षा विभाग के अंदर भी दलितों का अपमान कर रहे हैं। दलितों को बराबरी के अवसर नहीं दे रहे हैं। बाबा साहब ने बराबरी के अधिकार की बात कही थी, लेकिन बीजेपी दलितों के साथ समानता का व्यवहार नहीं करती है। एमसीडी के शिक्षा विभाग के टीचर्स एसोसिएशन ने एससी/एसटी आयोग से शिकायत की है कि प्रमोशन लिस्ट में दलित टीचरों के साथ भेदभाव हुआ है। कई दलित टीचर पात्र थे, फिर भी प्रमोशन की लिस्ट में उनको नहीं रखा गया।

अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि साल 1997-98 में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता थे, जो मुख्यमंत्री भी रहे। उन्होंने अपने लोगों को एमसीडी में टीचर की नौकरी दिला दी। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि वरिष्ठता सूची का पहला आधार ज्वाइंनिंग की तिथि होनी चाहिए। अगर जॉइनिंग की तारीफ एक समान है, तो जन्मतिथि को आधार बनाना चाहिए और अगर दोनों एकसमान हैं, तो मेरिट रैंक को आधार बनाना चाहिए। जब ज्वाइनिंग की तारीख ही अलग है तो वरिष्ठता सूची में पहले ज्वाइन करने वाले टीचर को बाद में ज्वाइन करने वाले से नीचे कैसे रख दिया। बीजेपी को पारदर्शिता दिखानी चाहिए, लेकिन उसने पोर्टल पर वरिष्ठता सूची को नहीं डाला।

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