दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने दिल्ली की सड़कों को दो महीने में आवारा कुत्तों से मुक्त कराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया है ये कहकर कि बेजुबानों को व्यवस्थित तरीके से योजना के तहत सड़कों से आश्रय घर में भेजने का काम दिल्ली सरकार को करना चाहिए। 10 लाख आवारा कुत्तों के लिए तय समय सीमा में आश्रय घरों में भेजना होगा। भाजपा ने दिल्ली की सता के 6 महीनों के कार्यकाल में एक भी चुनौती अथवा अपनी घोषणा को पूरा नही किया है जिसे उन्होंने जनता के समक्ष वादा किया था। 10 लाख आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने के बाद रखरखाव के लिए 1400 करोड़, नसबंदी के लिए 70 करोड़ और शैल्टर होम के लिए 400 एकड़ जगह मुहैया कराना भाजपा सरकार के लिए नामुकिन लगता है क्योंकि भाजपा मुख्यमंत्री अभी तक हर काम को अंजाम देने में विफल रही है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा कि 8 सप्ताह में दिल्ली के लगभग 10 लाख आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाना होगा, लेकिन आदेश से पहले निगमों की कुत्तों के प्रति नीति के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी करके उन्हें वहीं छोड़ दिया जाता था, जहां से उन्हें पकड़ा जाता है, जिससे इलाके के लोगों को सड़कों पर आवारा कुत्तों से मुक्ति नही मिली। राजधानी में निगमों में आसीन रही आप पार्टी और बीजेपी ने कुत्तों की नसबंदी का काम भी व्यापक रुप से नही किया, जिसके कारण राजधानी में 10 लाख से भी अधिक आवारा कुते दिल्ली की सड़कों पर है।
साल 2024 में देश भर में 37 लाख डॉग बाईट के मामले सामने आए, जिनमें 5.19 लाख 15 वर्ष की आयु के छोटे बच्चे डॉग बाईट का शिकार हुए है। दिल्ली में हर रोज 2000 डॉग बाईट के मामले दर्ज हो रहे है और पिछले वर्ष 2024 में जनवरी से जून तक 35198 डाग बाईट के मामले दर्ज हुए। विश्व रेबीज रिकॉर्ड अनुसार रेबीज से 36 प्रतिशत मौतें भारत में होती है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि 8 सप्ताह में सभी आवारा कुत्तों को आश्रय घर में भेजा जाए, एक भी आवारा कुत्ता सड़कों पर नजर नही आना चाहिए।
लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने आवारा कुत्तों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कहा है कि “दिल्ली-एनसीआर से सभी आवारा कुत्तों को हटाना दशकों की मानवीय, विज्ञान समर्थित नीति से एक कदम पीछे है“। “ये बेजुबान आत्माएं मिटाने के लिए ’समस्याएं’ नहीं हैं“। राहुल जी के सुझाव कि “आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और सामुदायिक देखभाल सड़कों को सुरक्षित रख सकते हैं, लेकिन इन बेजुबानां पर क्रूरता की जगह संवेदनशीलता के काम किया जाए“। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को लागू करने के लिए तुरंत पर्याप्त धन देना चाहिए।

