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चाहे कितने ही द कश्मीर फाइल्स, बंगाल फाइल्स फिल्म दिखाओ, समाज जागना ही नहीं चाहता…. मुकुल कानिटकर

संघ स्वयंसेवक संघ के सामाजिक, राजनैतिक, शिक्षा, और आर्थिक कामों को  हिंदी विवेक पत्रिका पहुंचा रही है। जो अब मराठी ही नहीं बल्कि हिंदी में भी है। पत्रिका ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर ‘दीपस्तम्भ’ ग्रंथ प्रकाशित किया। इसी प्रोग्राम में संघ के मुकुल कानिटकर, नितिन गडकरी ने कई खास बातें कहीं।  

संघ ने मजबूत की हिंदू धर्म और हिंदुत्व की भूमिका

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इतिहास किसी के लिए नहीं रुकता, इसलिए अपने अतीत से प्रेरणा और सीख लेनी चाहिए. हमारा राष्ट्र शाश्वत है, इसलिए हमारा देश पुनः महाशक्ति विश्वगुरु बने, इसकी प्रेरणा हमें अपनी संस्कृति-सभ्यता और धरोहर से मिलती है. हिंदू और हिंदुत्व शब्द को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, ऐसे समय में संघ ने मजबूती से हिंदू धर्म और हिंदुत्व के संवाहक की भूमिका निभाई. आज सभी क्षेत्रों में संघ के आयाम भारतीय मजदूर संघ, एबीवीपी, विहिप, सहकार भारती, किसान संघ, वनवासी कल्याण आश्रम आदि अनेक संगठन जिनकी सूची बहुत लम्बी है, राष्ट्र निर्माण में अपना उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं.

नितिन गडकरी ने हिंदी विवेक के वैचारिक योगदान की सराहना करते हुए कहा कि हिंदी विवेक ने वैचारिक व्यासपीठ के रूप में बहुत ही अच्छा काम किया है. महाराष्ट्र में मराठी भाषा में बहुत अच्छे-अच्छे विचार विवेक ने हमारे समाज जीवन में हम सबको दिए हैं. ये बहुत अच्छी बात हुई कि हिंदी विवेक ने हिंदी क्षेत्र में भी कदम रखा, पर मैं उनसे अनुरोध करूंगा कि केवल मराठी-हिंदी पर्याप्त नहीं है, अब हिंदुस्थान के सभी रीजनल लैंग्वेज में हमारे विचार को प्रभावी रूप से पहुंचाना, यह हमारी जिम्मेदारी है. यदि हम नहीं पहुंचाएंगे तो, इस संबंध में एक बहुत अच्छी फिलोसोफी है कि – ‘यदि आप कनवेंस नहीं कर सकते तो कन्फ्यूजन करने की शुरुआत कर दो’. और ये जो कन्फ्यूजन करने वाली ताकते जो हैं, जब डॉ. हेडगेवार जी थे तब से और १९४७ के बाद, नाम लेना उचित नहीं होगा, लेकिन अनेक लोगों ने संघ को जितना बदनाम कर सके, उतनी करने की कोशिश की है. और इसलिए ये विचारों का जो अमृत हैं, ये सभी रीजनल लैंग्वेज में समाज के आखिरी व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाकर वैचारिक संस्कार से उस व्यक्ति को सही बात समझाना, यह हमारा राष्ट्रीय परम कर्तव्य है. और हिंदी विवेक के ये काम बहुत अच्छे तरीके से कर रहा है. मैं हिंदी विवेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर, कार्यकारी संपादक पल्लवी अनवेकर और उनके साथ काम करनेवाले सभी पत्रकार साथियों को ह्रदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं. 

हिंदी विवेक के वैचारिक योगदान की नितिन गडकरी ने की सराहना

मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, रा.स्व. संघ के अ.भा. प्रचार टोली सदस्य मुकुल कानिटकर एवं हिंदुस्थान प्रकाशन संस्था के अध्यक्ष पद्मश्री रमेश पतंगे थे. साथ ही हिंदी विवेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (एसईओ) अमोल पेडणेकर व कार्यकारी संपादक पल्लवी अनवेकर, प्रसिद्ध उद्योगपति एवं समाजसेवी विनोद अग्रवाल, महाराज अग्रसेन अस्पताल के ह्रदय शल्य चिकित्सक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल अग्रवाल विशेष तौर पर उपस्थित थे.

संघ के १०० वर्षों के बता रही हिंदी विवेक पत्रिका

हिंदी विवेक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमोल पेडणेकर ने राष्ट्रीय पत्रकारिता में हिंदी विवेक मासिक पत्रिका के यशस्वी १७ वर्षों की यात्रा का वर्णन किया और हिंदी विवेक की उपलब्धियों से परिचित करवाया. इसके साथ ही ‘दीपस्तंभ’ ग्रंथ की प्रासंगिकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि संघ के अतीत से बोध लेते हुए वर्तमान एवं भविष्य में भी संघ स्वयंसेवकों, समाज एवं राष्ट्र के लिए यह ग्रंथ मार्गदर्शक सिद्ध होगा. इस ग्रंथ में संघ के १०० वर्षों का सिंहावलोकन तथा संघ कार्य, विस्तार, आयाम, चुनौती, उपलब्धियों को रेखांकित किया गया है.

धर्म रक्षा से ही राष्ट्र रक्षा संभव

पद्मश्री रमेश पतंगे ने कहा धर्म भारत की आत्मा है, सनातन और राष्ट्रवाद एक सिक्के के दो पहलु है. इसलिए इसका जागरण करना आवश्यक है. इसके लिए धर्म रक्षण और धर्म पालन करना होगा. जब हमारा समाज अपने इस दायित्व से विमुख हुआ तब विदेशी आक्रान्ताओं ने हम पर आक्रमण किया और विजयी हुए. अत: हिंदू समाज को अपना पौरुष जागृत करना होगा क्योंकि धर्म रक्षा से ही राष्ट्र रक्षा संभव है. धर्म जागरण ही राष्ट्र जागरण है. हमारी शक्ति राष्ट्र एवं समाज जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रकट होनी चाहिए, इसलिए संघ १०० वर्षों से कार्यरत है.

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