दिल्ली के आंकड़ों में डेंगू की केसेज भले ही कम हों, जलजनित बीमारियां मलेरिया, चिकनगुनिया केसेज बढ़ रहे हैं। हालांकि अब बीमारियों के खिलाफ लड़ाई मुश्किल में पड़ सकती है क्योंकि दिल्ली नगर निगम के एंटी मलेरिया विभाग से जुड़े DBC और CFW कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि वे 29 सितंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। ये 30 साल से शहर में मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम में अहम भूमिका निभा रहे हैं। दिल्ली हर साल बरसात के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से जूझती है। ऐसे में हड़ताल से शहर का मलेरिया उन्मूलन अभियान बाधित होना सीधे तौर पर आम नागरिकों की चिंता का विषय बन गया है।
हड़ताल के दौरान कर्मचारी काम से दूर रहे तो दिल्ली में मलेरिया रोकथाम अभियान, घर-घर सर्वे, फॉगिंग और दवाई का छिड़काव जैसी अहम गतिविधियाँ ठप पड़ सकती हैं। इसका सीधा असर दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य और सार्वजनिक जीवन पर पड़ सकता है।
30 साल से लंबित मांगें, अब आर-पार की लड़ाई
16 सितंबर को हुई मीटिंग में स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन सत्या शर्मा, हेल्थ कमिटी चेयरमैन मनीष चड्ढा, एडिशनल कमिश्नर समेत आला अधिकारियों के साथ एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन पदाधिकारियों की मीटिंग में कोई हल नही निकला। पदाधिकारियों ने बताया कि यूनियन ने 30 साल से चली आ रही लंबित जायज मांगों को रखा लेकिन मांगों को मानने के लिए बार-बार समय मांगा जा रहा है।
यूनियन समय देने के लिए तैयार नहीं । सभी 12 जोनों के DBC / CFW कर्मचारियों ने 29 सितंबर 2025 को अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहने के लिए अपनी बात को कहकर हड़ताल पर जाने का फैसला लिया और मीटिंग को खत्म कर दिया।
बच्चों और परिवार संग उतरेंगे कर्मचारी
एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन ने ऐलान किया कि सभी साथी मजबूत तरीके से अपनी मांगों के लिए अपने बच्चों के लिए अपने भविष्य के लिए 29 सितंबर 2025 को सिविक सेंटर गेट नंबर 5 पर अपने बीवी – बच्चों और माता-पिता समेत अपनी अपनी मांगों को लेकर जरूर बैठेंगे। और जब तक हड़ताल नहीं उठाएंगे जब तक हमारी मांग का निवारण नहीं होगा। दिल्ली के समस्त MTS (PH) DBC/CFW कर्मचारी 29 सितंबर 2025 को समय 10:00 बजे दिल्ली नगर निगम मुख्यालय पर 30 सालों से लंबित अपनी मांगों को लेकर अनिश्चित हड़ताल करेंगे।
मीटिंग पर मीटिंग… पर हल नहीं! मजबूरन हड़ताल का ऐलान
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी तीन दशक से लंबित जायज़ मांगों को निगम प्रशासन ने बार-बार टाल दिया है। कई दौर की बैठकों और आश्वासनों के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। इस कारण मजबूरन यूनियन ने परिवार सहित हड़ताल करने का निर्णय लिया है।
इसके लिए कर्मचारी उपराज्यपाल को, दिल्ली के मुख्यमंत्री, निगम के मेयर साहब, निगम के स्टैंडिंग कमिटी चेयरमैन साहिबा, निगम कमिश्नर को और आला अधिकारियों को कई बार पत्र द्वारा और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है।
कई बार बातचीत और मीटिंग के लिए भी कहा गया ।
इसके बावजूद
8 जुलाई 2025 को दिल्ली नगर निगम के जन स्वास्थ्य अधिकारी की चेयरमैनशिप में कर्मचारियों के साथ मीटिंग की गई।
उसके बाद 17 जुलाई को एडिशनल कमिश्नर साहब की अध्यक्षता में सभी आधिकारिक मीटिंग की गई।
तीसरी बार स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन साहिबा की अध्यक्षता में आलाधिकारी के साथ यूनियन पदाधिकारियों के साथ लंबित समस्याओं के निवारण के लिए बैठक तय की गई थी। जिसको तुरंत प्रभाव से कैंसिल कर दिया गया।

बेनतीजा बैठक
29 सितंबर से हड़ताल की जिम्मेदारी प्रशासन की
कई जूनियर कर्मचारियों को पहले से ही उनकी तनखा बढ़ाकर ग्रेड पे के आधार पर भी दी जा रही है ।

साल 1996 से कार्यरत कर्मचारियों को आज तक भी मिनिमम वेज पर रखा जा रहा है ।
कोई सुनवाई न होने पर और किसी भी तरीके से कोई भी अधिकारी कर्मचारीयों के साथ हो रहे भेदभाव को गंभीरता से नहीं ले रहा है।

आज तक कोई भी हल नहीं निकल पाने के कारण कर्मचारियों ने 29 सितंबर 2025 को दिल्ली नगर निगम मुख्यालय पर अनिश्चित कालीन हड़ताल करने का फैसला लिया। जिसकी पूर्णतया जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी । एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के महासचिव देवानंद शर्मा ने कहा कि “हमने बार-बार पत्र, मीटिंग और बातचीत से अपनी बात रखी, लेकिन जब हमारी नहीं सुनी गई तो हड़ताल के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। अब अगर बीमारियाँ बढ़ती हैं तो इसकी पूरी ज़िम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।”
हड़ताल से आगे की हद
हल नहीं निकला तो सभी कर्मचारी प्रतिदिन रोड पर 12 जोनों में पूरी ताकत के साथ पैदल परेड कर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए मार्च करेंगे।
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7 comments
निगम प्रसासन ने बहुत समय से हमारा शोषण किया है। हर बार आश्वासन के सिवा कुछ हाथ नहीं लगा। हमारी सभी परेशानियों को नजरअंदाज करते हुए निगम ने अगर कुछ दिया है वो केवल आस्वासन दिया है। हड़ताल क़ोई शोक नहीं मजबूरी है। अपने बच्चों के भविष्य के लिए हड़ताल जरूरी है।
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