दिल्ली की सिविक सेंस में बदनुमा दाग़ की तरह भलस्वा, ओखला और गाज़ीपुर की लैंडफिल कब खत्म हो रहीं इसका नहीं पता लेकिन, इनके खत्म होने के बाद खाली ज़मीन का क्या इस्तेमाल हो इसका सुझाव दिल्ली नगर निगम को चाहिए। एक्सपर्ट, पर्यावरण जानकार, एनजीओ से प्रस्ताव निगम ने मांगा है। एक्सपर्ट ने बताया कि कूड़े से बिजली के संयंत्र सिर्फ 20 एकड़ में ही लग जाते हैं। एमसीडी का प्लान है कि खाली हुई जमीन का एक-तिहाई हिस्सा जंगल के रूप में विकसित हो, 1 तिहाई ही कचरा प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं के लिए इस्तेमाल हो बाकी बची भूमि पर पर्यटन या मनोरंजन से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए ही सुझाव या प्रस्ताव मांगे हैं।
इससे पहले ये जानना जरूरी है कि किस लैंडफिल साइट पर कितनी ज़मीने खाली हैं-
| लैंडफिल साइट | क्षेत्रफल | शुरुआत का वर्ष | शुरुआती कचरा (लाख मीट्रिक टन) | वर्तमान कचरा (लाख मीट्रिक टन) | स्थिति |
| ओखला | 62 एकड़ | 1996 | 60 | 29.2 | साफ करने की प्रक्रिया जारी |
| गाजीपुर | 70 एकड़ | 1984 | 140 | 83.7 | अभी भी बड़ा कचरा शेष |
| भलस्वा | 70 एकड़ | 1994 | 80 | 47 | धीरे-धीरे कचरा कम हो रहा |
लैंडफिल साइटों को खत्म करने की निगम की डेडलाइन
एमसीडी का लक्ष्य है कि ओखला साइट को जुलाई 2026 तक, भलस्वा को दिसंबर 2026 तक और गाजीपुर को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह कचरा मुक्त किया जाए। खबर है कि ओखला में अब कूड़ा नहीं डाला जाता लिहाजा सबसे पहले 62 एकड़ ज़मीन खाली होगी।
स्वास्थ्य और पर्यावरण पर असर
लंबे समय से इन लैंडफिल साइटों के कारण आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोग सांस और त्वचा संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं। अब निगम चाहता है कि जमीन का इस्तेमाल ऐसा हो जिससे लोगों को फायदा मिले और पर्यावरण को भी राहत मिले।

