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क्या तोड़े जाएंगे लोगों के घरों के बाहर ढंके हुए स्टॉर्म ड्रेनेज, मास्टर प्लान लागू होने में सबसे बड़ी बाधा

50 साल के बाद ही सही दिल्ली को उसका नया ड्रेनेज मास्टर प्लान भले मिल गया लेकिन इसे लागू करना एक बड़ी मुश्किल है। वजह नया बनने वाला जिस पुराने स्टॉर्म ड्रेनेज से जुड़ेगा वो खुद अतिक्रमण का शिकार है। लोगों ने घरों के बाहर के नाले ( स्टॉर्म ड्रेनेज) को पूरी तरह ढंक दिया। कई घरों ने सीवरेज सिस्टम भी इसी में खोल दिये हैं ऐसे में नये सिस्टम लागू करने से पहले क्या ये अतिक्रमण खत्म होगा। सबसे बुरा हाल तो अनधिकृत कॉलोनियों का है।  अधिक बारिश होने पर नालों पर दबाव बढ़ जाता है। दिल्ली सरकार का आंकड़ा कहता है कि रिहायशी कॉलोनियों में 4000 से 5000 किमी लंबा स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज नेटवर्क बना है करीब 85 फीसदी पर अतिक्रमण है।

आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में 1799 अनधिकृत कॉलोनियां हैं। सरकारी तंत्र ने अभी तक 1226 कॉलोनियों में सड़क, सीवरेज, वॉटर के साथ ही  के साथ ही स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाए गए हैं। क्या अब इन पर भी गाज गिरेगी? दरअसल ये नाले अभी तक बड़े नालों के सहारे यमुना में गिरते हैं। जैसे ही यमुना का वाटर लेवल 204 मीटर तक पहुंचता है नालों का पानी बैक मारने लगता है। यही वजह है कि अनधिकृत कालोनियों और दिल्ली के निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति आ जाती है।

58 हज़ार करोड़ के बजट वाला ये मास्टर प्लान 56 एमएम की बारिश में बरसाती पानी को हटाने के लिए बनाया गया है। अभी तक है 25 एमएम प्रति घंटा की बारिश हटाने वाला मास्टर प्लान है। पीडब्ल्यूडी नए मास्टर प्लान की नोडल एजेंसी है। दिल्ली में 20 बड़े नाले हैं। पीडब्ल्यूडी 2 हजार किमी, एमसीडी 500 किलोमीटर नाले को कवर करता है। नए प्लान के तहत एमसीडी, सिचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी एक यूनिट की तरह काम करेंगे।

साल 2025 से पहले दिल्ली में मास्टर प्लान 1976 में बना। दिल्ली का  जल निकासी नेटवर्क 18,958 किलोमीटर लंबा है।

दिल्ली में लगभग है, जो आठ अलग-अलग एजेंसियों व विभागों मसलन लोक निर्माण विभाग, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, एमसीडी, डीडीए, एनडीएमसी के अधीन है. इस मास्टर प्लान को सभी विभागों और एजेंसियों के परामर्श से तैयार किया गया है.

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