कहानी की शुरुआत वहीं से होती है, जहाँ यात्रा की सुरक्षा खत्म होती है।
देशभर में एक खतरनाक चलन तेजी से पैर पसार रहा है — यात्री बसें अब यात्रियों से ज़्यादा माल ढो रही हैं! यह सिर्फ कानून की धज्जियाँ उड़ाने का मामला नहीं, बल्कि मानव जीवन, सरकारी राजस्व और ईमानदार व्यापार — तीनों के लिए सीधा खतरा बन चुका है।
सच्चाई जो छिपाई जा रही है
देश के कई हिस्सों में यात्री बसें अवैध रूप से माल, पैकेट और ट्रंक से भरी जा रही हैं।
बस की छतों और डिब्बों में भरे ये सामान कई बार नशीले पदार्थ, ज्वलनशील वस्तुएँ या प्रतिबंधित सामग्री होते हैं।
इनकी कोई बिलिंग या GST एंट्री नहीं होती — नतीजा, सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान।
रिश्वतखोरी का पूरा नेटवर्क इस ग़ैर-क़ानूनी सिस्टम को जिंदा रखे हुए है — RTO, पुलिस और GST विभाग की मिलीभगत खुला राज़ है।
कई घटनाओं में ऐसे सामान से आगजनी, विस्फोट और यात्रियों की मौतें तक हो चुकी हैं — लेकिन जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं
खतरे की तीन मार
यात्रियों की जान को खतरा
सरकार को राजस्व का नुकसान
और बढ़ता हुआ भ्रष्टाचार व टैक्स चोरी का जाल
अब चाहिए सख़्त एक्शन, सिर्फ बयान नहीं!
1️⃣ जिन बसों में अवैध सामान पाया जाए — लाइसेंस तत्काल रद्द किया जाए।
2️⃣ पहली बार पकड़े जाने पर भारी जुर्माना, दूसरी बार पर बस ज़ब्त।
3️⃣ RTO, पुलिस और GST विभागों में भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच हो।
4️⃣ वाणिज्यिक ढुलाई करने वाले बस मालिकों को अलग गुड्स व्हीकल रजिस्ट्रेशन लेना अनिवार्य हो।
5️⃣ सरकार को स्पष्ट आदेश जारी करना चाहिए —
“यात्री बसों में किसी भी प्रकार का वाणिज्यिक सामान ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित है, उल्लंघन पर बस ज़ब्त की जाएगी।”
संगठन की अपील
आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (पंजी.) के अध्यक्ष
राजेन्द्र कपूर
केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह करते हैं —
अब वक्त आ गया है कि सड़क सुरक्षा, कानून व्यवस्था और ईमानदार व्यापारिक प्रतिस्पर्धा को बचाने के लिए इस अवैध ढुलाई पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।


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