दिल्ली नगर निगम के जन-स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत 5200 एमटीएस/सीएफडब्ल्यू कर्मचारी अपनी तीन प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठ गए हैं। इनकी मांगों को लेकर आम आदमी पार्टी और इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (आईवीपी) ने खुला समर्थन दिया है।
एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने सिविक सेंटर पहुंचकर कर्मचारियों से मुलाकात की और कहा, “भाजपा सरकार को इनकी जायज़ मांगें तुरंत माननी चाहिए। समान वेतन, मेडिकल अर्न लीव और अनुकंपा पर नौकरी — ये कोई एहसान नहीं, हक़ है।”
क्या हैं कर्मचारियों की मांगें?
- समान वेतन — वर्तमान में छह अलग-अलग वेतन स्केल लागू हैं, जिससे असमानता और भेदभाव पैदा होता है।
- मेडिकल अर्न लीव — 25–30 वर्षों की सेवा के बावजूद कर्मचारियों को मेडिकल अवकाश का लाभ नहीं मिलता।
- अनुकंपा पर नौकरी — मच्छरजनित बीमारियों के जोखिम में काम करने वाले कर्मचारियों के परिवार को सुरक्षा देने की मांग।
दिल्ली में डेंगू-मलेरिया का खतरा, लेकिन समाधान नहीं

अंकुश नारंग ने चेताया कि मौसमी बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच 5200 कर्मचारियों की हड़ताल से हालात और बिगड़ सकते हैं।
“भाजपा की चार इंजन सरकार बजट का रोना रो रही है, लेकिन विज्ञापन और रैलियों पर करोड़ों खर्च कर रही है।”
उन्होंने मेयर राजा इकबाल सिंह को “डमी मेयर” बताते हुए इस्तीफे की मांग की और कहा कि
“मेयर को न जनता की परवाह है, न कर्मचारियों की। सदन में मुद्दा उठाया, पत्र लिखा — लेकिन समाधान नहीं निकला।”
आईवीपी का समर्थन: “शोषण बंद हो, समाधान शुरू हो”
वरिष्ठ पार्षद मुकेश गोयल ने भी हड़ताल पर चिंता जताते हुए कहा,“डेंगू-मलेरिया के बढ़ते मामलों के बीच कर्मचारियों की हड़ताल महामारी को न्योता दे सकती है। निगम आयुक्त और महापौर को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।”
आईवीपी ने निगम कर्मचारियों की मांगों को पूरी तरह जायज़ बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की है।

