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CED पर वसूली का आरोप, इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने जांच की मांग उठाई EXCLUSIVE

  दिल्ली नगर निगम के केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उसने इंजीनियरों की रेगुलराइज़ेशन फाइलें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजने में जानबूझकर देरी की है। 2016 के बाद से अब तक कोई फाइल UPSC को नहीं भेजी गई, जबकि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर साल विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) आयोजित होनी चाहिए। इस लापरवाही से सैकड़ों इंजीनियरों का करियर अटका हुआ है और एसोसिएशन ने स्वतंत्र जांच की मांग की है।

2016 से ठप रेगुलराइज़ेशन, निगम इंजीनियरों का मनोबल टूटा

निगम इंजीनियर्स को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) रेगुलराइज़ करता है। तब क्या हो जब निगम का केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) फाइल UPSC ना भेजे। आरोप है कि निगम का केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) फाइल अटका कर वसूली करना चाह रहा। सैकड़ों इंजीनियर्स के करियर को रोक रहा है। खुलासा हुआ कि निगम के केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) ने आखिरी बार रेगुलराइज़ की फाइल 2016 में UPSC को भेजी थी। 9 साल की देरी पर सवाल उठाते हुए दिल्ली नगर निगम की इंजीनियरिंग एसोसिएशन ने जांच की मांग की है। एमसीडी कमिश्नर संजीव खिरवार से गुहार लगाई की मामले की जांच करवाएं।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के साफ निर्देश है कि हर साल  DPC आयोजित होगी। कमाल देखिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद  कार्यकारी अभियंता (सिविल) के पद पर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से नियमितीकरण साल 2016 से अब तक नहीं किया गया है। कई अभियंता संवर्गों में भी पदोन्नति प्रक्रिया ठप है।

नगर निगम की इंजीनियर एसोसिएशन ने कहा कि दिल्ली के केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) में विभागीय पदोन्नति समितियों (DPC) के आयोजन में लगातार हो रही अस्पष्ट एवं अनावश्यक देरी की कड़ी निंदा करती है। इस दीर्घकालिक निष्क्रियता ने अधिकारियों के मनोबल को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, उनके कैरियर उन्नयन को बाधित किया है तथा उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप का सहारा लेने के लिए विवश किया है।

CAT आदेश की गलत व्याख्या से प्रमोशन रोके गए, एसोसिएशन नाराज़

आपको बता दें कि Nek Ram Meena बनाम MCD प्रकरण में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) ने वरिष्ठता में ह्रास पर रोक लगाते हुए विवादित वरिष्ठता सूची 2025 के आधार पर पदोन्नतियों पर स्थगन आदेश दिया था। फिर भी  एसोसिएशन का आरोप है कि इस अंतरिम आदेश की व्याख्या  जानबूझकर  गलत  रूप से की गई है, जिसका असर ये हो रहा कि उन  अधिकारियों के प्रमोशन रोक दिये गए जो अधिकरण के आदेश के दायरे में नहीं आते।

नाम ना छापने की शर्त पर एक इंजीनियर ने कहा कि निगम का केंद्रीय स्थापना विभाग (CED) इसके जरिए वसूली करना चाह रहा। सैकड़ों लोगों के करियर को रोक रहा है।

एक इंजीनियर ने कहा कि CED विभाग में कई लोग दशकों से जमे हुए हैं क्या इनके ऊपर निगम की ट्रांसफर पॉलिसी लागू नहीं होती। कही यही तो भ्रष्टाचार की वजह तो नहीं? प्रतिक्रिया के लिए जब CED विभाग के अधिकारी को फोन किया गया तो दूसरी तरफ फोन नहीं उठाया गया। आधिकारिक जवाब आते ही खबर को फिर अपडेट किया जाएगा।

एसोसिएशन ने गंभीर चिंता जताई की ये लीगल राय (विधिक राय)  से वरिष्ठ अभियंताओं के हित प्रभावित हुए हैं जो वर्ष 2012 से तदर्थ आधार पर कार्यकारी अभियंता के रूप में कार्यरत हैं और जिनका UPSC के माध्यम से नियमितीकरण लंबित है। नियमितीकरण की प्रकिया 2016 मे वर्ष 2012 से तदर्थ आधार पर कार्यकारी अभियंता को नजरअंदाज किया गया था। उसके बाद 2018,2020 एवं 2021 में इस प्रकिया को अचानक बिनाकारण बंद कर दिया गया था।

इंजीनियर एसोसिएशन के अध्यक्ष, नरेश शर्मा ने कहा कि CED से बार-बार इस प्रकिया के सस्पेंड और देरी का जवाब मांगा तो साफ जवाब नहीं मिला। नरेश ने मांग की है कि मामले की जांच की जाए। ये घोर प्रशासनिक लापरवाही है।

एसोसिएशन की मांग है कि सभी लंबित DPC का आयोजन DoPT के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तत्काल किया जाए।

CAT के अंतरिम आदेश को उसके निर्धारित दायरे तक ही सीमित रखते हुए लागू किया जाए तथा उसका विस्तार न किया जाए।

साल 2016 से अब तक की देरी  की स्वतंत्र जांच कराई जाए।

एसोसिएशन स्पष्ट करती है कि ये सभी मांगें निष्पक्षता, पारदर्शिता तथा उन अभियंताओं के वैध कैरियर उन्नयन के संरक्षण के हित में की जा रही हैं, जिन्होंने सार्वजनिक अवसंरचना के लिए वर्षों तक सेवा प्रदान की है।

हम विधिसम्मत एवं संवैधानिक उपायों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं तथा यदि शीघ्र सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आगे की वैधानिक कार्यवाही करने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं।

—ख़बर यहीं तक

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