राजधानी दिल्ली भलस्वा, ओखला और गाज़ीपुर में स्थित कूड़े के पहाड़ों की वजह से भी चर्चा में होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं शहर के कचरे का करीब 60% हिस्सा BWG (Bulk waste-generators) से आता है। किसी शहर वो यूनिट या संस्था BWG में आती हैं जो हर रोज़ 100 किलोग्राम या उससे अधिक ठोस कचरा पैदा करती हैं। उदाहरण के लिए सरकारी विभाग, स्थानीय निकाय, सार्वजनिक उपक्रम, स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, होटल, बैंक, मॉल, बड़ी हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स या औद्योगिक या वाणिज्यिक प्रतिष्ठान हैं।
बड़े कचरा उत्पादक (बीडब्ल्यूजी)- बीडब्ल्यूजी है 100 किलो से ज्यादा कचरा पैदा कर रहे हैं।
दिल्ली नगर निगम ने 85 लाख रूपए के 32 हज़ार चालान इन BWG के खिलाफ जारी कर दिये हैं। क्योंकि कई एमसीडी के साथ रजिस्टर नहीं हैं। ये 100 किलो से ज्यादा का कचरा हर रोज़ पैदा तो कर रहे लेकिन खाद बनाने कोई संयंत्र नहीं लगाया हुआ है। हैरान होंगे कि 2 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में सिर्फ 3749 बीडब्ल्यूजी के तौर पर एमसीडी के साथ रजिस्टर हैं। ये हाल तब है जब पिछले साल से ही निगम पंजीकरण कराने पर जुटा है। इन्हें एमसीडी के 311 एप पर खुद को रजिस्टर करवाना होगा। सुप्रीम कोर्ट भी सख्त है कि 2016 के बीडब्लूजी के नियमों का पालन किया जाना चाहिए। ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016 के अनुसार, BWG को ये काम करने ज़रूरी–
जहां कचरा पैदा हो रहा वहीं पर गीले और सूखे कूड़े को अलग-अलग करना । गीले कचरे का ऑन-साइट प्रोसेसिंग (जैसे कम्पोस्टिंग)। सूखे कचरे को निगम या इलाके की अधिकृत एजेंसी को सौंपना
पंजीकरण से बड़ा फायदा होगा ये बिना खाद वाले संयंत्र के साथ नहीं चल पाएंगे और गीले कचरे से खाद बनाएंगे तो खाद बना लेंगे। सोर्स पर ही गीले कूड़े का निस्तारण होगा। लैंडफिल पर कम कूड़ा पहुंचेगा। कूड़े को ले जाने वाली लागत घटेगी। पर्यावरण को कम नुकसान होगा।
देखिए कौन से ज़ोन आगे हैं और कौन पीछे
| MCD ज़ोन | BWG पंजीकरण |
|---|---|
| दक्षिण (South Zone) | 1023 |
| मध्य (Central Zone) | 522 |
| नजफगढ़ (Najafgarh Zone) | 439 |
| पश्चिमी (West Zone) | 406 |
| शाहदरा दक्षिणी (Shahdra South Zone) | 284 |
| सिविल लाइंस (Civiline Zone) | 59 |
| नरेला (Narela Zone) | 55 |
| शाहदरा उत्तरी (Shahdra North Zone) | 29 |

