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Motivation & Personality Development

ज़िंदगी पर नहीं, खुद पर काम करो !

नेशनल बुक ट्रस्ट के मुखिया रहे बलदेव भाई शर्मा ने एक मुलाकात में कहा कि “ज़िंदगी में एजेंडा नहीं चलता है। सब धरा रह जाता है।”

कितनी बढ़िया बात है। कभी बाहरी परिस्थितियां इंसानी जीवन में इतना टफ लगती हैं कि हारा हुआ सा महसूस करने वाला शख्स खुद को सबसे असहाय, कमज़ोर और बड़ा मूर्ख मानने लगता है। समय बदला, परिस्थितियां बदलीं और कभी खुद को हारा हुए इंसान मानने वाला ही खुद को बड़ा तीरंदाज मानता है और बाकी को मूर्ख। अगर ऐसा आपके साथ है तो समझना आप बाहरी रिमोट से कंट्रोल हो रहे। सिर्फ खुद पर काम करते जाओ। परिणाम की अपेक्षा मत करना। यही जड़ है परेशानी की। इसीलिए तो कहा कहा गया है कि काम करो लेकिन फल की इच्छा मत करो।

अपेक्षाओं का बोझ -सबसे भारी

ज़ेन ज़ी को बता दूं जिससे जितनी ज्यादा अपेक्षा करोगे उतनी ही बड़ा बोझ बनकर वो तुम्हारे मन पर सवार रहेगा। गर्लफ्रेंड से जितनी अपेक्षा या परवाह करोगे वो उतना ही भाव में रहेगी और मन से आप उतने ही कमज़ोर हो जाओगे वो मजबूत। मुझे ग़लत ना समझिए। परवाह करिये लेकिन जरूरत से ज्यादा नही। एक क्रिटिकल लिमिट तय करिए उससे नीचे नहीं जाइए। वरना आपका आत्म सम्मान नहीं बचेगा। यहां गर्लफ्रेंड का उदाहरण सिर्फ भाव को समझाने के लिए कहा है।  अपेक्षा जिससे जितना करोगे वो उतना ही मजबूत बन जाएगा और आपको कमज़ोर बना देगा। लड़कियां गर्लफ्रेंड की जगह ब्वॉयफ्रेंड पढ़ें। मैं ऐसे रिलेशनशिप को एंडोर्स नहीं कर रहा। बस ऐसे रिलेशनशिप में अपेक्षाओं के बोझ तले दबे लड़के-लड़कियों को सचेत कर रहा।

जीवन परफेक्ट नहीं होगा, लेकिन जीने लायक ज़रूर होगा

मैं बुज़ुर्गों से ज्यादा बात करना पसंद करता हूं। करीब करीब सभी ने कहा कुछ बुरा हुआ यो हो रहा है आप रोक नहीं सकते। हां इससे निबटना कैसे है इसका फ़ैसला ही आपके वश में है। अब जब बुरा हो ही रहा है मतलब किसी बुरे कर्म का फल है। अब जब वो घट गया तभी से समझो वो जब हो ही गया तो मतलब खत्म हो रहा है। बहुत से लोगों से मिला जो सिविल सर्विस की तैयारी में जीवन निकाल देते हैं लेकिन सिर्फ प्राइमरी के मास्टर ही बन पाते हैं। सोचो ये भी नहीं बन पाते तो क्या होते। आप, मैं, वो और सभी कभी न कभी फेल हो सकते हैं। फेल होने में कोई बड़ी बात नहीं है। पर खुदकुशी कर लो ये तो मर्दों वाली बात नहीं हुई। सांसें बड़ी हैं। जीवन बड़ा है। तुम बड़े हो। कोई फ्लैट खरीदने जाते हो तो क्या उसमें सब कुछ परफेक्ट मिलता है नहीं। जब पार्किंग बढ़िया मिलती है तब फ्लैट साइज़ छोटा होता है और भी न जाने क्या-क्या। भाई जीवन परफ्केट नहीं होगा। जीवन कांस्टेंट नहीं है। ये बदलता रहता है।

ज़िदगी की क्रीज़ पर लंबा टिके रहना है तो दूसरों से अपेक्षा या परवाह नहीं करो। अच्छा खेलोगे। किसी की तारीफ़ में सीना चौड़ा और बुराई मिलने पर कोपभवन में न चले जाना। एक समान भाव से रहने की प्रैक्टिस करो। ढीले मत पड़ो।

हमेशा याद रखना वो हार हो या जीत आपकी ज़िंदगी में आपको रोकने का काम तो नहीं कर रही। किसी काम को शुरू किया सफलता नही मिली तो क्या ये आखिरी मान लिया है?

10 मिनट रूको, 10 साल की दिशा मिल जाएगी

Attention चोरी के हर ख़ेल को मत ख़ेलो। तय नहीं कर पा रहे क्या करूं या न करूं तो 10 मिनट रूक कर सोच लो आपके लिए क्या बेहतर होगा। यही 10 मिनट ज़िंदगी के 10 साल को बेमिसाल बना देगा। ऐसी बेपरवाही देगा कि बुरी से बुरी परिस्थिति में सीना तानकर और सर ऊंचा करके चलते रहोगे। देखने वाले दंग रह जाएंगे।

—बस यहीं तक—

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