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दिल्ली में प्रदूषण पर सियासी घमासान; AQI 400 पार, कांग्रेस ने भाजपा सरकार को ठहराया जिम्मेदार

देवेन्द्र यादव बोले—रेखा गुप्ता सरकार की निष्क्रियता से बिगड़ी राजधानी की हवा

दिल्ली की हवा एक बार फिर ज़हरीली हो चुकी है। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुँच गया है, जिससे सांस लेना मुश्किल हो गया है। इस गंभीर स्थिति पर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा की रेखा गुप्ता सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की निष्क्रियता और खोखली बयानबाजी के कारण दिल्लीवासी प्रदूषण के कहर को झेलने को मजबूर हैं। देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा सरकार की नाकामियों का खामियाजा दिल्ली की जनता भुगत रही है। पिछले 11 महीनों से रेखा गुप्ता सरकार केवल बयानबाजी कर रही है, जबकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।

सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी और सरकार की चुप्पी

देवेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि प्रदूषण के मुख्य कारण क्या हैं और स्थायी समाधान के लिए विशेषज्ञों से चर्चा कर कोर्ट को अवगत कराए। लेकिन सरकार ने केवल GRAP-4 लागू कर प्रतिबंधों का रास्ता चुना है, जिससे जनता, व्यापार और दैनिक गतिविधियाँ प्रभावित हो रही हैं।

स्वास्थ्य ढाँचे की नाकामी

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में प्रदूषण से ग्रस्त मरीजों के इलाज की कोई उचित व्यवस्था नहीं है।

  • अस्थमा, आँखों में जलन, फेफड़ों और गले की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
  • स्वास्थ्य ढाँचा पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।
  • प्रदूषण नियंत्रण में फेल सरकार मरीजों को राहत देने में भी असमर्थ है।

एंटी स्मॉग गन पर सवाल

देवेन्द्र यादव ने सरकार की एंटी स्मॉग गन नीति को भी कठघरे में खड़ा किया।

  • दिल्ली में कुल 300 एंटी स्मॉग गन हैं, जबकि सड़कों की लंबाई लगभग 32,000 किमी है।
  • एक गन प्रतिदिन केवल 25–30 किमी सड़क पर ही छिड़काव कर सकती है।
  • पूरी क्षमता से भी ये मशीनें केवल 9,000 किमी तक ही कवर कर सकती हैं।
  • धीमी गति से चलने वाली मशीनों के कारण कई जगह जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे वाहनों से निकलने वाली जहरीली गैसें प्रदूषण को और बढ़ा देती हैं।

उन्होंने कहा कि इन मशीनों की प्रभावशीलता पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन नहीं हुआ है। सरकार केवल दिखावे के लिए इन्हें चला रही है।

गरीबों और मजदूरों पर असर

GRAP-4 लागू होने से सबसे अधिक असर गरीबों, दैनिक मजदूरों और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों पर पड़ा है।

  • उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है।
  • पहले से ही GRAP-3 की पाबंदियों में जी रहे लोग अब और कठिनाई में हैं।

—ख़बर यहीं तक

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