सरकार का बजट इस साल बढ़कर एक लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि 2019 में 54,800 करोड़ रुपये था। इसलिए सरकार ने करीब छह साल बाद अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में बदलाव किया। पिछला बदलाव 07 अगस्त 2019 को हुआ था।
आइए जानते हैं क्या बदलाव हुआ?
विभागाध्यक्षों एवं प्रशासनिक सचिवों के वित्तीय अधिकार बढ़ाए जाने के पीछे वजह है दिल्ली की सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं न केवल समय पर पूरा हों बल्कि जनता तक उनकी पहुंच भी हो।
मुख्यमंत्री के अनुसार प्रशासनिक सचिव अब सभी आईटी संबंधी वस्तुओं की खरीद, मरम्मत, किराए पर लेना और रखरखाव के अलावा उपकरणों आदि की सीधे खरीद कर सकेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा ” विभागीय कार्यों को अनावश्यक देरी से बचाने, योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन और उन्हें समय पर पूरा करने के लिए आवंटित बजट का प्रभावी उपयोग किया जाए, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है. “
नियुक्ति का भी मिला अधिकार
विशेष मामलों में प्रशासनिक सचिवों को पूर्ण वित्तीय अधिकार प्रदान किए गए हैं। इनमें व्यक्तिगत कंसल्टेंट्स, कंसल्टेंसी, प्रोफेशनल्स, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) आदि की नियुक्ति के अलावा सभी आईटी संबंधी वस्तुओं की खरीद, मरम्मत, किराए पर लेना और रखरखाव व मानव संसाधन की नियुक्ति, उपकरणों की खरीद व कंडम वाहनों के स्थान पर नए वाहनों की खरीद शामिल है।
यह निर्णय न केवल सुशासन को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जनता तक सेवाओं के वितरण को भी और अधिक प्रभावी एवं समयबद्ध बनाएगा, साथ ही फाइलों के अनावश्यक विभागीय आवागमन के कारण हो रहे विलंब को रोका जा सकेगा।

