पहले सुप्रीम कोर्ट, फिर दिल्ली सरकार ने आवारा कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट्स (Feeding points-भोजन केंद्र) बनाने और खतरनाक कुत्तों को शेल्टर में रखने के निर्देश दिए है। देर से ही सही करीब 27 दिन बाद, दिल्ली नगर निगम जागा और वेस्ट जोन पहला जोन बन गया जिसमें 5 फीडिंग प्वाइंट बना दिए हैं। खास बात है कि प्वाइंट्स बनाने में इलाके के पार्षद की सहमति जरूरी है।
अब निगम के बाकी 11 जोन में भी इसी तरह के फीडिंग प्वाइंट बनेंगे। अधिकारियों ने बताया कि ये फीडिंग प्वाइंट्स (Feeding points-भोजन केंद्र) जरूरत के हिसाब से बढ़ाए भी जा सकते हैं। यह दूसरा कदम है जब जगह की पहचान करने के बाद फीडिंग पॉइंट बनाने का काम शुरू भी कर दिया गया। 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि केवल खूंखार कुत्ते ही शेल्टर में रखे जाएंगे।
दिल्ली नगर निगम में सिर्फ 20 नसबंदी केंद्र हैं और एक भी शेल्टर होम नहीं है लिहाजा नसबंदी होने के बाद खूंखार कुत्तों को 10 दिन से ज्यादा नहीं रख सकते ऐसे में एक बार नसबंदी किए गए कुत्तों को चार दिन के भीतर उसी जगह पर वापस छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें उठाया गया।
कौन बताता है कि इलाके में आवारा कुत्ते हैं?
वेटनरी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अक्सर इलाके के लोग खूंखार और खतरनाक कुत्तों की शिकायत करते हैं और निगम का दस्ता जैसे ही पहुंचता है डॉग लवर्स कार्रवाई का विरोध करते हैं और तब तक कुत्ता अपनी लोकेशन बदल देता है और कई बार तो व्यवहार भी।
आंकड़ों में दावा किया कि करीब 60 वार्ड में 80% नसबंदी पूरी कर ली गई है और एक दिन में अधिक से अधिक 500 कुत्तों की नसबंदी निगम कर सकता है। निगम कुत्ते को पड़कर किसी एनजीओ को सौंप दे तो नसबंदी फीस 900 प्रति कुत्ता। उलट एनजीओ कुत्ते को पकड़कर निगम को सौंपे तो फीस 1000 रुपए है।
स्टैंडिंग कमेटी की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने खुद निगरानी करने का दावा किया तो वही एक उप समिति भी बनाई गई है जो आवा कुत्तों के मामले को देखती है।

