चार दशकों से अधिक समय से न्याय और आर्थिक पुनर्वास इंतज़ार कर रहे दंगा पीड़ितों के लिए बड़ी ख़बर। 1984 के सिख विरोधी दंगों में मारे गए पीड़ितों के आश्रितों को करुणामूलक (अनुकंपा) आधार पर रोजगार मिलेगा। इस नीति कैबिनेट बैठक में मंजूरी दी गई।
2007 में मंत्रिमंडल ने भी फैसला लिया था लेकिन 18 सालों से अलग अलग कारणों की वजह से नहीं हो सका। फैसले से पात्र परिवारों को जल्दी रोजगार मिलेगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार नई नीति की के तहत जिन पीड़ितों के आश्रित अब 50 वर्ष से अधिक आयु के हो चुके हैं और सेवा ग्रहण करने की स्थिति में नहीं हैं, उन्हें परिवार की अगली पीढ़ी जैसे पुत्र, पुत्री, बहू या दामाद के नामांकन का विकल्प दिया गया है। इससे रोजगार का लाभ मिल सकेगा। यह प्रावधान उन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया गया है जिनमें कई पात्र आश्रित अब बूढ़े हो चुके हैं।
नई नीति में आयु सीमा और शैक्षणिक योग्यता में आवश्यक छूट प्रदान की गई है। यह सभी प्रावधान दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देशों और विधिक प्रक्रिया के अनुरूप होंगे। साथ ही सत्यापन, शिकायत निवारण एवं विभागीय आवंटन के लिए एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित तंत्र स्थापित किया गया है, जिससे नियुक्तियों की प्रक्रिया न्यायसंगत और जवाबदेह ढंग से संचालित हो सके।
—ख़बर यहीं तक—
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