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MTSJusticeNow: “दीप जलाने की उम्मीद थी, अंधेरा दे गए”: MCD कर्मचारियों की हड़ताल 19वें दिन भी जारी

दिल्ली नगर निगम के जन स्वास्थ्य विभाग के DBC/CFW (MTS) कर्मचारी 29 सितंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। 17 अक्टूबर को यह आंदोलन 19वें दिन में प्रवेश कर चुका है—दिन-रात, बिना रुके। कर्मचारियों की मांगें सिर्फ वेतन या सुविधा नहीं, बल्कि सम्मान और स्थायित्व की हैं। आज 19 वें दिन कर्मचारी निगम के बेरुखी के कारण अपने बच्चों को हिंदुओं से इतने बड़े पर्व दिवाली कपड़े रोटी न दिलवाने के कारण खुद भी कपड़े उतार कर बैठ गया है।साथ ही साथ रोष प्रकट करते हुए काली पट्टी बांधी है।

19 वें दिन प्रदर्शन में शामिल एक पिता देवानंद शर्मा ने कहा कि 14 अक्टूबर को सिविक सेंटर में मेयर साहब ने सदन में आश्वासन दिया था कि दीपावली से पहले कर्मचारियों के घरों में दीप जलेंगे। लेकिन अफसोस, 5000 परिवारों के घरों में उम्मीद की लौ बुझा दी गई। वादा किया गया था कि 24 घंटे में कमेटी फैसला लेगी, लेकिन 15 अक्टूबर को लेबर कोर्ट में निगम अधिकारियों के असंतोषजनक जवाब के चलते उन्हें सख्त नोटिस मिला—7 दिन में निर्णय लें कि कर्मचारी गलत नहीं हैं।

अब हालात इतने गंभीर हैं कि 17 अक्टूबर से कर्मचारी गेट नंबर 5 पर बिना कपड़ों के प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है—“जब हमारे बच्चों के पास पहनने को नहीं, तो हम भी नंगे शरीर से अपनी पीड़ा दिखाएंगे।” यह सिर्फ विरोध नहीं, एक करुण पुकार है उस व्यवस्था से जो दो वक्त की रोटी भी नहीं दे पा रही।

30 वर्षों की सेवा देने वाले कर्मचारियों को आज भी स्थायित्व नहीं मिला। संवाद की कमी, प्रशासनिक बेरुखी और वादों की अनदेखी ने कर्मचारियों को आहत किया है। फिर भी उनका हौसला टूटा नहीं—बल्कि और मजबूत हुआ है।

आमरण अनशन पर बैठे हैं:
एंटी मलेरिया एकता कर्मचारी यूनियन के कृष्णपाल और महिपाल 16 अक्टूबर से आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

सफाईकर्मियों ने हड़ताल की चेतावनी दे दी- 11 सूत्री मांगों की गूंज
MCD समस्त यूनियन कोर कमेटी ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी 11 मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो दिल्ली में व्यापक हड़ताल होगी। इनमें शामिल हैं:

  • 1998–2006 के अस्थायी कर्मचारियों का नियमितीकरण
  • करुणामूलक आधार पर 2010–2020 के कर्मचारियों को स्थायित्व
  • 1996–1998 के लेफ्ट आउट कर्मचारियों को सेवा लाभ
  • गैप ईयर समाप्त करना
  • एरियर का एकमुश्त भुगतान
  • मृत कर्मचारियों के आश्रितों को योग्यता के आधार पर नौकरी
  • दिल्ली की जनसंख्या के अनुपात में नई सफाई कर्मचारियों की भर्ती

—-ख़बर यहीं तक—-

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