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नेता जी का माइंडसेट: कब झुकना है, कब अकड़ना है, और कब किसी को रिप्लेस करना है।

राजनीति कवर करते हुए मेरा ध्यान नेताओं की सॉफ्ट सिक्ल्स पर रहा। उनको खाते-पीते, व्यवहार करते देख कुछ बातें ऑब्जर्व की हैं। मुझे लगता है यही वो गुण हैं जो उन्हें शासक बना देते हैं। एक नेता को बहुत अच्छी तरह पता होता है कि उसे राजनीति में कब पकड़ना है? कब झुकाना है? कब खुद झुकना है? कब पकड़ना है? कब अकड़ना है? जब झुकना है तब अकड़ गए या परिस्थिति में अंतर करने का इन्हें बढ़िया ज्ञान होता है। ये सबसे अच्छे की कामना करते हैं लेकिन बुरे दौर के के लिए तैयार रहने वाला ही बढ़िया नेता बनता है।

एक कहावत है नेता कभी न देता। दरअसल आम जीवन में इतने मर खप चुके होने के सैचुरेटेड स्तर पर होते हैं। जहां इनको अपनी सभी इंद्रियों पर कंट्रोल होता है। ये अपना फाइनेंशियल और दूसरी तरह की मदद को कभी खत्म नहीं करते। ज्यादा इनको ज्ञान कभी मत दो। वह ज्ञान आप पर कब इस्तेमाल कर रहे होंगे पता भी नहीं लगेगा।  काम निकालना हो तो ऐसे बात करेगें जैसे ये आपके हितैशी और सगे हैं। जबकि नेता जी लोग खुद के सबसे बड़े सगे हैं।  इनका कोई सगा नहीं। जीन भर की टिप दे रहा जिस काम से आपका घर चलता हो सबसे ज्यादा ध्यान उस पर ही लगाओ। ये राजनीतिक गुरू बनाते हैं । कई साल बीत जाते हैं लेकिन एक दिन जब इनका गुरू वीक दिखता है तो ये उसकी जगह लेकर उसे रिप्लेस कर देते हैं। एक सांसद की खूबी कहें या चालाकी सामने से आपको ऐसे मिलेंगे जैसे कितने दिन के बिछड़े हैं। फोन करने पर गलती से भी फोन नहीं उठाते। अक्सर ये उसके साथ ही कदम ताल मिलाकर चलते हैं जिसका सितारा बुलंद हो। यानि जिधर ज्यादा हरियाली (फायदा) उधर नेता जी। ऑब्जर्व करिए क्या आप ऐसे किसी नेता को जानते हैं? कमेंट करिएगा  

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