15 नवंबर से 15 मार्च तक चलने वाले विंटर एक्शन प्लान के तहत हर बेघर नागरिक को छत और सुरक्षा का इंतजाम रेखा सरकार ने कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि बेघरों को सहारा देने वाली योजना के लिए इस बार आधुनिक तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है।
स्टोरी हाइलाइट्स:
- 15 नवंबर से 15 मार्च तक चलेगा विंटर एक्शन प्लान 2025
- दिल्ली में 250 अस्थायी शेल्टर, 120 जगहों पर होंगे स्थापित
- रेस्क्यू वैन में लगा होगा GPS, रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक रहेंगी सक्रिय
- ‘रैन बसरा’ ऐप से बेघरों की ट्रैकिंग और ‘NSIA’ ऐप से शेल्टर निरीक्षण
- शेल्टरों में CCTV, कंबल, बिजली और मच्छर नियंत्रण जैसी सुविधाएँ
- 24×7 संचालन और बायोमैट्रिक उपस्थिति से होगी जवाबदेही तय
- महिलाओं व बच्चों के शेल्टर अब आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ेंगे
सर्दियों में बेघरों को राहत देने के लिए 250 अस्थायी शेल्टर तैयार हैं जो 120 जगहों पर लगेंगे करीब 2,500 लोग इसमें ठहर सकेंगे। ये रेस्क्यू टीमों और कंट्रोल रूम की निगरानी में रहेंगे। ख़ास बात है कि बेघरों को सड़कों से सुरक्षित शेल्टरों तक पहुंचाने के लिए जीपीएस से लैस रेस्क्यू वैन रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक सक्रिय रहेंगी।
मुख्यमंत्री के अनुसार ड्यूसिब ने बेघरों की निगरानी और बचाव के लिए डिजिटल तकनीक को अपनाया है। ‘रैन बसरा’ मोबाइल एप के माध्यम से बेघर नागरिकों की रिपोर्टिंग और ट्रैकिंग की जाती है। वहीं ‘नाइट शेल्टर इंस्पेक्शन’ एप (एनएसआईए) से शेल्टरों की निगरानी और निरीक्षण किया जाता है, जो जीपीएस ट्रैकिंग और रीयल-टाइम डेटा अपडेट से जुड़ा है।
दिल्ली अर्बन शेल्टर इंप्रूवमेंट बोर्ड (ड्यूसिब) के अधीन ‘शेल्टर होम योजना’ के तहत राजधानी दिल्ली में कुल 197 शेल्टर होम हैं, 153 पुरुष, 17 महिला, 19 परिवार और बच्चों के लिए तथा 8 विशेष श्रेणी (एचआईवी, टीबी, ड्रग एडिक्ट आदि) के शेल्टर शामिल हैं। हर शेल्टर होम में बिस्तर, गद्दे, चादरें, तकिए, कंबल, बिजली, मच्छर नियंत्रण यंत्र, वॉटर कूलर और महिलाओं के लिए सीसीटीवी लगाई गई है।
बुनियादी सुविधाओं पर होगा फोकस
मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि शेल्टरों की गुणवत्ता में सुधार के लिए नई नीति तैयार की गई है। अब एजेंसियों के चयन में गुणवत्ता और लागत आधारित चयन प्रणाली अपनाई गई है। एजेंसियों को शेल्टरों का 24×7 संचालन, सफाई, रखरखाव, अग्नि सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था, और सुरक्षा का जिम्मा सौंपा जाएगा। साथ ही शेल्टर संचालित करने वाले स्टाफ की आधार आधारित बायोमैट्रिक उपस्थिति आवश्यक होगी। महिलाओं और बच्चों के शेल्टरों को आंगनवाड़ी केंद्रों से जोड़ा जाएगा, ताकि स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा सेवाएं सुनिश्चित की जा सकें। मुख्यमंत्री का यह भी कहना है कि शेल्टरों की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग कमेटी, जॉइंट एपेक्स एडवाइजरी कमेटी (जेएएसी) और मुख्य अभियंता, ड्यूसिब की देखरेख में नियमित निरीक्षण किया जाता है। साथ ही ड्यूसिब की ओर से हर शेल्टर में स्वच्छता, अग्नि सुरक्षा, कीट नियंत्रण और नियमित मरम्मत की निगरानी भी की जाती है।
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