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भाजपा ने फर्जीवाड़ा कर सूरत निगम को स्वच्छता सर्वेक्षण में बनाया नंबर-1, जांच हो- अंकुश नारंग

आम आदमी पार्टी ने नगर निगमों के स्वच्छता सर्वेक्षण में भाजपा शासित सूरत नगर निगम को एक बार फिर पहली रैंक मिलने पर सवाल उठाया है। ‘‘आप’’ के एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सूरत निगम को फर्जीवाड़ा कर के स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 बनाया गया। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूरत नगर निगम 100 फीसद कूड़े का निस्तारण नहीं करता है। फिर भी वह स्वच्छता सर्वेक्षण में हिस्सा कैसे लिया? सूरत में ‘‘आप’’ के पार्षद जब निगम के लैंडफिल साइट पर पहुंचे तो पहले उन्हें अंदर जाने से रोका गया। लेकिन फिर भी वे अंदर गए तो सूरत निगम प्रशासन ने कमियां छिपाने के लिए कूड़े में आग लगा दी। आम आदमी पार्टी इस फर्जीवाड़े की जांच की मांग करती है।

शुक्रवार को “आप” मुख्यालय पर एमसीडी की पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय व महेश खींची के साथ प्रेस वार्ता कर अंकुश नारंग ने कहा कि जब भी हिंदुस्तान में स्वच्छता सर्वेक्षण पर बात होती है तो भाजपा गुजरात मॉडल की बात करती है और गुजरात को धरती का स्वर्ग और देश का सबसे स्वच्छ शहर बताया जाता है, लेकिन तस्वीरें इससे बहुत अलग हैं। फिर भी स्वच्छता सर्वेक्षण में सूरत नगर निगम को पहले नंबर का अवार्ड दे दिया गया और दिखाया गया कि सूरत में 100 फीसद डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और निस्तारण होता है। जबकि यह दावा बिल्कुल गलत है।

अंकुश नारंग ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में प्रयास किया कि सारे वूलनरेबल पॉइंट को खत्म कर दिल्ली को टॉप 10 रैंकिंग में लाया जाए। इसके लिए बहुत प्रयास किया गया और 500 पॉइंट की पहचान करके उन्हें खत्म करने का काम किया गया। लेकिन जब रैंकिंग देखी गई तो गुजरात का सूरत सबसे पहले नंबर पर आया। जब सूरत की जमीनी हकीकत देखी गई तो वहां पर कूड़े के पहाड़ बने हुए हैं। जबकि भाजपा वाले 100 फीसद कूड़े के निस्तारण की बात करते हैं। हाल ही में कूड़े के पहाड़ पर आग लग गई थी और 60 घंटे बाद बुझाई जा सकी। अगर 100 फीसद कूड़ा निस्तारण होता है, तो किस पहाड़ में आग लगी?

अंकुश नारंग ने कहा कि जिन एजेंसियों को वहां 100 फीसद कूड़ा निस्तारण का काम दिया गया है, वे एजेंसियां वहां के नगर निगम और भाजपा नेताओं के साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर रही हैं। वहां पिछले पांच वर्षों से कूड़े का निस्तारण बिल्कुल नहीं हो रहा है। इन्हीं पांच वर्षों में सूरत को बार-बार स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर वन दिखाया जा रहा है। हमारी मांग है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान स्वच्छता सर्वेक्षण में सूरत नगर निगम को जो लगातार नंबर एक पर दिखाया गया है, उसका पुनर्मूल्यांकन होना चाहिए। आम आदमी पार्टी सूरत नगर निगम को पत्र भी भेजेगा। साथ ही, सूरत के ‘‘आप’’ पार्षदों की ओर से लिखे गए पत्र के साथ एक कवरिंग लेटर भी संलग्न किया जाएगा।

अंकुश नारंग ने मीडिया को तस्वीरें दिखाते हुए कहा कि इन तस्वीरों में कूड़े के पहाड़ पर लगी आग साफ नजर आ रही है। जब सूरत नगर निगम ने कूड़े का 100 फीसद वैज्ञानिक निस्तारण किया ही नहीं, तो उसे सर्वेक्षण में शामिल ही नहीं होना चाहिए था। आखिर भाजपा ने किस सांठगांठ के तहत सूरत नगर निगम को स्वच्छता में पहला नंबर दिया है। इसकी जांच होनी चाहिए। गुजरात में भाजपा इन ठेकेदारों के साथ मिलकर लगातार भ्रष्टाचार कर रही है, उसकी विजिलेंस और विभिन्न संस्थाओं द्वारा जांच होनी चाहिए। जिन लोगों ने भ्रष्टाचार किया है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए।

इस दौरान, एमसीडी की पूर्व मेयर शैली ओबेरॉय ने कहा कि गुजरात में स्वच्छता सर्वेक्षण के नाम पर फर्जीवाड़ा चल रहा है। स्वच्छता सर्वेक्षण हर साल आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जिसका उद्देश्य देश के शहरों की सफाई व्यवस्था का आकलन करना है। यह सर्वे कई मापदंडों पर आधारित होता है। उन्होंने कहा कि देश भर के नगर निगम अपना डेटा मंत्रालय को जमा करते हैं। यह डेटा साल भर के डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन, स्रोत पर अलगाव, वेस्ट प्रोसेसिंग और सैनिटेशन इंफ्रास्ट्रक्चर पर आधारित होता है। इस डेटा को सत्यापित, आकलित और मूल्यांकित किया जाता है, जिसके बाद एक संयुक्त स्कोरिंग के आधार पर हर शहर को रैंकिंग दी जाती है।

शैली ओबेरॉय ने कहा कि 2023, 2024 और 2025 में सूरत नगर निगम को इस सर्वेक्षण में पहली रैंकिंग दी गई। गुजरात में आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने उस मंत्रालय को एक चिट्ठी लिखी है जो यह सर्वेक्षण कराता है। यह चिट्ठी दर्शाती है कि इस सर्वे पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान लग चुका है। “आप” के पार्षद गुजरात में खजोद डिस्पोजल साइट पर निरीक्षण करने गए। जब अधिकारियों को लगा कि पार्षद इस फर्जीवाड़े को पकड़ लेंगे, तो उन्हें अंदर नहीं जाने दिया गया। बाद में जब पार्षद जबरन वहां पहुंचे, तो उन्होंने पाया कि स्वच्छता सर्वेक्षण की गाइडलाइन के अनुसार वही शहर भाग ले सकता है जो 100 फीसद सॉलिड वेस्ट का निस्तारण करता हो, लेकिन वहां अभी भी 1.4 मिलियन मीट्रिक टन कूड़ा पड़ा हुआ था।

शैली ओबेरॉय ने सवाल उठाया कि जब सूरत निगम ने अनिवार्य मापदंड को ही पूरा नहीं किया, तो उन्हें रैंकिंग कैसे मिली? पार्षदों ने मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि सूरत निगम द्वारा जमा किए गए डेटा का पुनः सत्यापन किया जाए। यह जनता को गुमराह करने का तरीका है और जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां डेटा में हेरफेर किया गया है।

शैली ओबेरॉय ने कहा कि दिल्ली में “आप” सरकार के दौरान हमारा मकसद दिल्ली को कूड़ा मुक्त करना था। हमारी पूरी टीम अधिकारियों के साथ गली-मोहल्लों में सफाई का निरीक्षण करती थी और कूड़े के पहाड़ों पर वेस्ट डिस्पोजल की निगरानी करती थी। लेकिन जहां भाजपा की सरकार है, वहां फर्जीवाड़ा करके रैंकिंग प्राप्त की जाती है। आम आदमी पार्टी केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय से अपील की कि सभी शहरों के निगमों द्वारा जमा किए गए डेटा का पुनः आकलन, सत्यापन और मूल्यांकन हो। पिछले 5 सालों के डेटा की जांच के लिए एक पारदर्शी विशेष टीम गठित की जाए ताकि यह फर्जीवाड़ा जनता के सामने आ सके।

उधर, पूर्व मेयर महेश खींची ने कहा कि भाजपा धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के जरिए अपने शासित नगर निगमों वाले शहरों को नंबर वन दिखाना चाहती है। गुजरात के सूरत स्थित खजोद स्थान पर पिछले तीन साल से कूड़े के पहाड़ इकट्ठे हो गए हैं, जिन्हें बिल्कुल भी हटाया नहीं गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का फर्ज बनता है कि जब किसी शहर को रैंकिंग में नंबर वन दिया जाए, तो वहां 100 फीसद कूड़े का निस्तारण होना चाहिए, लेकिन सूरत में ऐसा नहीं हुआ। पिछले तीन साल में वहां कूड़ा इतना बढ़ गया कि आज वे पहाड़ बन गए हैं। गुजरात के स्थानीय “आप” पार्षदों ने इसका विरोध किया और वे लैंडफिल साइट पर गए, लेकिन उन्हें वहां घुसने नहीं दिया गया। जब पार्षदों को रोका गया, तो वहां प्रशासन द्वारा अपनी कमियों को छिपाने के लिए कूड़े में आग लगा दी गई। यह आग लगातार पांच दिन तक जलती रही ताकि कूड़े को खत्म किया जा सके।

महेश खींची ने कहा कि हमारे पार्षद लगातार इसकी आवाज उठाते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। इस कूड़े के निस्तारण के लिए वहां के ठेकेदारों को करीब 250 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया, मगर कूड़ा नहीं उठा। उन्होंने कहा कि भाजपा जिन राज्यों में सत्ता में है, वहां अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जीवाड़ा करके अपने शहरों को नंबर वन दिखाने की कोशिश करती है। दूसरी तरफ, दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान कूड़े के निस्तारण के लिए करीब 500 गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट चिह्नित किए गए थे और उन्हें हटाया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में कूड़े के पहाड़ों को कम करने का काम किया गया और “आप” सरकार ने इसे 50 फीसद तक कम किया।

महेश खींची ने कहा कि जिस तरह अन्य मामलों में भाजपा की ओर से फर्जीवाड़ा किया गया, उसी तरह अब भी फर्जीवाड़ा करके खुद को आगे दिखाने की कोशिश की जा रही है। आज दिल्ली की लैंडफिल साइट के मामले में भी हेराफेरी हो रही है। वहां का कूड़ा उठाकर किराड़ी और मुंडका विधानसभा क्षेत्रों में डाला जा रहा है, जिसका आम आदमी पार्टी विरोध करती है। केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि सूरत में रैंकिंग को लेकर किए गए इस फर्जीवाड़े की जांच हो। सूरत में सीवेज सिस्टम की हालत खराब है और वहां रोज 20 से 25 हजार शिकायतें आ रही हैं। वहां एक्यूआई का स्तर 300 के पार जा रहा है। इन हालातों में सूरत को इंदौर के साथ नंबर वन रैंकिंग देना गलत है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस फर्जीवाड़े को बंद कर जनता के सामने असलियत लाई जाए।

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