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नाम में क्या रखा है? इंडिया को दी चुनौती

मशहूर कहावत है कि नाम में क्या रखा है? गुलाब के फूल को किसी और नाम से बुलाएं तो क्या इसकी खुशबू चली जाती है? अब हीरालाल को डायमंड तो कह नहीं सकते तो भारत को इंडिया क्यों? राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े न्यास प्लान कर रहा है एक राष्ट्र एक नाम भारत के सिद्धांत पर काम करेगा और राष्ट्रपति मुर्मू की इस बाबत एक रिप्रेंटेशन भी देगा। मध्य प्रदेश की करीब 4 यूनिवर्सिटी ने रेजोल्यूशन भी पास कर दिया है। उत्थान न्यास ने ‘इंडिया’ नाम को चुनौती दी। विद्वानों की मांग है कि ‘गुरुकुल प्रणाली की वापसी अनिवार्य’ ह

प्रयागराज के महाकुंभ में ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ द्वारा आयोजित ‘ज्ञान महाकुंभ’ में देशभर के विद्वानों ने ‘इंडिया’ नाम पर गंभीर मंथन किया। डॉ. मोतीलाल गुप्ता ने ‘इंडिया’ को केवल नाम तक सीमित बताया, जबकि एम गुरु जी ने ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच कहा कि भारत के अलावा कुछ मान्यता प्राप्त नहीं है। संत श्री आनंद स्वरूप सरस्वती ने विदेशी शिक्षा प्रणाली पर खेद जताया और गुरुकुल परंपरा की वकालत की। साध्वी समदर्शी गिरी ने मैकाले की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए। जनता की आवाज़ फाउंडेशन के सुंदरलाल बोथरा और उद्योगपति घेवरचंद्र वोरा ने भारत के नाम की महत्ता पर जोर दिया।

‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास’ ने प्रयागराज के महाकुंभ में शिक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों पर केंद्रित ‘ज्ञान महाकुंभ’ आयोजित किया। इसमें ‘इंडिया’ को ‘भारत’ से बदलने के लिए सामूहिक आवाज़ उठाई गई। विद्वानों ने कहा कि भारत सिर्फ एक भू-भाग नहीं, बल्कि एक भावना और परंपरा है। गुरुकुल प्रणाली को दोबारा स्थापित करने की मांग की गई, जबकि विदेशी शिक्षा प्रणाली पर अरबों खर्च की आलोचना की गई। साध्वी समदर्शी गिरी ने मैकाले की शिक्षा पर बुनियादी आलोचना की। उद्योगपति घेवरचंद्र वोरा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ‘भारत’ नाम को पहचान मिलनी चाहिए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा और सांस्कृतिक उत्थान को मजबूत करना था।

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