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अस्पताल से गायब हुआ ‘स्वतंत्रता सेनानी’, जांच की मांग

आपने अक्सर अस्पताल से बच्चा, मुर्दाघर से लाश गायब होने के बारे में सुना होगा लेकिन क्या हो जब अस्पताल से स्वतंत्रता सेनानी ही गायब हो जाए। चौकिए मत, अस्पताल से कोई स्वतंत्रता सेनानी गायब नहीं हुआ। बल्कि सेनानी का नाम ही अस्पताल से गायब हो गया। कब हुआ? कैसे हुआ? किसी को नहीं पता।

मामला राजधानी दिल्ली के बड़े अस्पताल लोकनायक अस्पताल का है। अंग्रेजों के जमाने में इसे “इरविन अस्पताल” कहा जाता था लेकिन साल 1977 में इसे भारत सरकार ने बदलकर “लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल” कर दिया। एक स्वतंत्रता सेनानी के नाम पर अस्पताल के नाम को रखना ऐतिहासिक था। आप को जानकर होगी कि गुपचुप तरीके से तीसरी बार नाम बदल गया। लेकिन किसने ? क्यों? और कब बदल दिया ये एक रहस्य है। अब अस्पताल के बोर्ड पर आपको
लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल से ‘जयप्रकाश नारायण’ नाम हट चुका है। और लोक नायक अस्पताल कहा जाता है।

हटाने का न केवल विरोध हो रहा है बल्कि सीधे दिल्ली मुख्यमंत्री से नाम को फिर से बहाल करने की मांग भी हो रही है।

मनोनीत निगम पार्षद मनोज जैन ने अस्पताल से नाम हटाए जाने को
ऐतिहासिक अस्मिता के विरुद्ध और देश को दिशा देने वाले
स्वतंत्रता सेनानी और समाजवादी विचारक जयप्रकाश नारायण का अपमान बताया।

सीएम से जांच की मांग करते हुए मनोज जैन ने कहा कि

“लोक नायक जयप्रकाश नारायण (LNJP) अस्पताल की नई स्टेशनरी, वेबसाइट, साइनबोर्ड्स और सरकारी दस्तावेज़ों में केवल “लोक नायक अस्पताल” नाम लिखा जा रहा है।
नाम बदलने की प्रक्रिया की जाँच की जाए – आदेश किसका था, प्रक्रिया क्या थी?
अगर ये बिना उचित प्रक्रिया के हुआ है तो इसे निरस्त कर “लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल” नाम फिर से स्थापित किया जाए।”

ऐतिहासिक विषय से छेड़छाड़ की जांच और राष्ट्रनायक जयप्रकाश नारायण की गरिमा जल्द से जल्द बहाल हो इसके लिए सीएम को पत्र लिखा है।

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