DelhiCivicAlerts
Motivation & Personality Development

स्पीकिंग कोर्स करवाते हैं, चुप रहना कोई नहीं सिखाता

सर्दियों में जिस दिन सूरज नहीं निकलता, धूप की कीमत उसी दिन पता चलती है। हमारे जन्म से जब तक हम जिएंगे वो बिना लाग-लपेट, छुट्टी के उगता और अस्त होता रहेगा। किसी टूरिस्ट प्लेस पर झरने को बहने के लिये बोलना नही पड़ता वो भी Effortless, एक हम हैं जो बोलने पर इतना ध्यान देने लगे हैं कि चुप रहना या मौन रहना भूल ही गये हैं। इंसान बोलते हैं तो चुप नही होते और चुप रहते हैं तो फिर बोलने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ती है। कमाल देखिए प्रकृति से अलग इंसान को बोलने के लिए स्पीकिंग कोर्स है।

ऐसे लगेगा जैसे बोले तो कुछ खो दिया या खत्म कर दिया। सुना तो पा लिया। बोलना outgoing और मौन रहना incoming है। हम वहीं हैं लेकिन बोले तो खो दिया और मौन रहे तो पा लिया पेड़, सूर्य, पृथ्वी, मिट्टी, दिन-रात की तरह Effortless है ये चुप रहना। एक होता है खाने की कमी से मौत होना जबकि ज्यादा खाने से भी मौत हो जाती है। खुद की सूचना और बोलने की लिमिट तय करिए वरना खो देगें।

Related posts

#LifeLessons: “कभी टैलेंटेड गधा बनता है, कभी गधा टैलेंटेड। लेकिन जो खुद के साथ खड़ा रहता है, वही असली खिलाड़ी है!”

delhicivicalerts

नेगेटिव (Negative) दिमाग़ी डेटा को हटाने का सबसे आसान और प्रैक्टिकल तरीका (The easiest and most practical way to remove the negative data of thought)

delhicivicalerts

हर इंसान एक टेंडेंसी है—पहचानो, समझो, और उसी अंदाज़ में बात करो! रिश्तों और सफलता का मनोवैज्ञानिक रहस्य

delhicivicalerts

Leave a Comment