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AAP की नई मुसीबत, कोविड काल की इस योजना में 145  करोड़ घोटाले का आरोप, एलजी ने दिए एंटी करप्शन ब्रांच को जांच के आदेश

योजना के तहत वर्ष 2018 में 4900 और 2019 में 2071 छात्रों को कोचिंग देने का प्रस्ताव था। लेकिन कोविड महामारी के दौरान, जब लाखों परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, तब इन नेताओं ने कोचिंग माफिया के साथ मिलकर भारी घोटाला किया। योजना का प्रारंभिक बजट केवल 15 करोड़ रुपये  था, लेकिन 31 जुलाई 2021 से अगस्त 2022 के बीच प्राइवेट कोचिंग संस्थानों ने 145 करोड़ रूपये का बिल भुगतान हेतु प्रस्तुत किया। हैरानी की बात यह है कि इन बिलों के संबंध में किसी तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। बाद में आप सरकार ने इन बिलों के भुगतान के लिए कोचिंग संस्थानों को अदालत भेज दिया।

आम आदमी पार्टी पर एक नए घोटाले का आरोप लगा है। दिल्ली के गृह, शिक्षा एवं उच्च शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने दावा किया कि एससी/ एसटी/ ओबीसी/ ईडब्ल्यूएस/ अल्पसंख्यक छात्रों को यूपीएससी, एसएससी, डीएसएसएसबी, नीट, क्लैट जैसी प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर पूर्ववर्ती सरकार ने भ्रष्टाचार किया। सूद ने बताया कि सीएम रेखा गुप्ता की संस्तुति पर दिल्ली के उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने एंटी करप्शन ब्रांच को जांच के आदेश दिए हैं। 

खास बात ये है कि सीएम रेखा गुप्ता ने भी अपने एक्स पोस्ट पर कहा कि आम आदमी पार्टी ने दलितों के नाम पर सत्ता हथिया कर दलित बच्चों के भविष्य को लूटा है। इन्होंने बाबा साहेब के आदर्शों का अपमान किया है और शिक्षा जैसे पवित्र क्षेत्र को भी अपनी भ्रष्ट नीतियों से गंदा किया है। जिन दलित बच्चों को कोचिंग मिलनी थी उनके नाम पर बिना दस्तावेज़ के दावे, बिना हस्ताक्षर के आवेदन मिले और कई संस्थानों के तो 100% दावे ही फर्जी पाए गए हैं। भ्रष्टाचार निरोधक शाखा इन वित्तीय अनियमितताओं की जांच करेगी। बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी होगा।

सूद ने बताया कि योजना साल 2018 में आम आदमी पार्टी (आप) सरकार द्वारा शुरू की गई थी। योजना का उद्देश्य एससी/ एसटी/ ओबीसी/ ईडब्ल्यूएस/ अल्पसंख्यक छात्रों को प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग मुहैया कराना था, जिसकी राशि दिल्ली सरकार द्वारा कोचिंग संस्थानों को दी जानी थी। तथाकथित “स्वघोषित” और अब “बेरोजगार” आप नेताओं ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की विचारधारा का अपमान करते हुए उनके नाम पर एक जनकल्याणकारी योजना को भ्रष्टाचार का माध्यम बना दिया।

इस प्रकरण की जांच कराई गई, जिसमें सामने आया कि संस्थानों द्वारा 13,000 छात्रों की सूची दी गई, लेकिन मात्र 3,000 छात्रों की पहचान सत्यापित हो सकी। शेष छात्रों की कोई जानकारी या रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं हैं।

शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि आईएएस कोचिंग की औसत फीस एक लाख रुपये, एमबीए/क्लैट के लिए 50 हजार रुपये, एसएससी/एलआईसी के लिए 30 हजार रुपये, ग्रुप-C के लिए 25 हजार रुपये और इंटरव्यू कोर्स के लिए 10 हजार रुपये  होती है। अगर मान भी लिया जाए कि सभी सत्यापित छात्रों ने केवल आईएएस कोर्स किया, तब भी अधिकतम खर्च 30 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता, जबकि पिछली सरकार 145 करोड़ रुपये का बोझ भाजपा सरकार पर डाल गई।

दिल्ली के एससी/ एसटी कल्याण मंत्री रविन्द्र इन्द्राज ने कहा कि यह योजना दलित छात्रों को उच्च शिक्षा का अवसर देने और करियर बनाने हेतु शुरू की गई थी, लेकिन पिछली सरकार ने इस पवित्र उद्देश्य को भी भ्रष्टाचार से लिप्त कर दिया। घोटाले में लगभग 35 निजी संस्थान संलिप्त पाए गए हैं, जिनके पास 100 छात्रों की भी पुष्टि योग्य जानकारी नहीं है।

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