आपको जानकर हैरानी होगी कि अन्य राज्यों की तरह दिल्ली सरकार का सुप्रीम कोर्ट में कोई विशेष अधिवक्ता पैनल नहीं है। ऊपर से दिल्ली सरकार से संबंधित लगभग 4,000 मुकदमे अलग-अलग न्यायालयों और अधिकरणों में लंबित हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने निर्देश दिया कि कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों और क्षेत्रीय विशेषज्ञों का एक पैनल गठित किया जाए जो लंबित मामलों की पर सुझाव दे कि कौन-कौन से मुकदमे गैर-आवश्यक हैं और उन्हें किस तरह से कम किया जा सकता है। वहीं विधि विभाग को निर्देश दिए कि दिल्ली उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न अधिकरणों में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी के लिए पूर्व निर्धारित शर्तों के साथ वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक विशेष पैनल गठित किया जाए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार के लिए एक स्थायी पैनल गठित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश भी दिए। ये पैनल बेहतर मुकदमा प्रबंधन और त्वरित निपटान के लिए प्रणालीगत समाधान भी सुझाएंगे।
राजधानी में 11 न्यायिक जिले हैं, जो राजस्व जिलों के अनुरूप हैं और ये सात प्रमुख न्यायालय परिसरों में संचालित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि शास्त्री पार्क, कड़कड़डूमा और रोहिणी में तीन नए न्यायालय परिसर निर्माणाधीन हैं और इनके पूरा होते ही इस कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि कानूनी दृष्टि से भी सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप नए अधिनियमों और कानूनों की संभावना तलाशी जाए और पुराने, संविधान पूर्व कानूनों जैसे कि पंजाब कोर्ट अधिनियम, न्याय शुल्क अधिनियम और वाद मूल्यांकन अधिनियम को प्रतिस्थापित किया
विवाद समाधान से जुड़ी प्रक्रिया को लेकर मुख्यमंत्री ने दिल्ली विवाद समाधान समिति (DDRS) द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। यह समिति विधि विभाग के अंतर्गत कार्यरत एक स्वायत्त संस्था है जो वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) के माध्यम से मामलों का निपटान करती है।

