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सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद अवैध निर्माण की गुत्थी और उलझी, क्या निगम जाएगा सुप्रीम कोर्ट?

सुप्रीम कोर्ट ने ताज़ा आदेश दिया कि चांदनी चौक के इलाके में कोई भी आवासीय संपत्ति कमर्शल में नहीं बदली जाएगी। किसी बिल्डर या नगर निगम अधिकारियों की मिलीभगत पाई गई तो उसे SC गंभीरता से लेगा। पुलिस को निगरानी करने के आदेश दे दिए। बस यहीं से कन्फ्यूजन का दौर शूरू हो गया।

अवैध निर्माण कौन रोकेगा पुलिस या एमसीडी?

इसी साल केन्द्र सरकार और दिल्ली सरकार के एक आदेश के तहत दिल्ली पुलिस को नियमानुसार निर्माण गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया था और MCD को अवैध निर्माण पर नज़र रखने को कहा। सुप्रीम कोर्ट के ताज़ा आदेश के बाद व्याख्या कुछ इस तरह हो रही जैसे जैसे अवैध निर्माण के लिए अब पुलिस उत्तरदायी होगी?  उससे भी बड़ा पेंच अवैध निर्माण को तय करने का फ्रेमवर्क क्या है? ताज़ा आदेश को लेकर सिविल सोसाइटी और एमसीडी अधिकारियों में भ्रम है।  

मेयर और कमिश्नर बताएं क्या है अवैध निर्माण

चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव एवं दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है की निस्संदेह खतरनाक तरीके से किये जाने वाला अवैध निर्माण खासकर चौथी, पांचवी मंजिल का निर्माण रोकना जरूरी है।

कपूर ने दिल्ली नगर निगम के महापौर सरदार राजा इकबाल सिंह आयुक्त अश्वनी कुमार और पुलिस आयुक्त से अनुरोध किया है की नगर निगम माननीय सर्वोच्च न्यायालय में तुरंत निवेदन कर अवैध निर्माण की व्याख्या कराये और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को बताये की केन्द्र सरकार एवं दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस को नियमानुसार निर्माण गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया है।

नगर निगम स्पष्ट करवाये की क्या स्वीकृत नक्शे अनुसार बन रही बिल्डिंग या कानूनन रिपेयर को और मास्टर प्लान 2021 एवं 2041 में नोटिफाई पेडसट्रियन शॉपिंग स्ट्रीट, मिक्स्ड लैंड स्ट्रीट एवं पूर्ण कमर्शियल स्ट्रीट पर व्यवसायिक निर्माण एवं उपयोग को भी माननीय सर्वोच्च न्यायालय रोकना चाहता है।

चांदनी चौक नागरिक मंच के महासचिव एवं दिल्ली भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर

एमसीडी की नज़र में नक्शा पास करवा कर ही निर्माण करना वैध है। दिल्ली मास्टर प्लान 2021 में जिन सड़कों गलियों का जो व्यवसायिक अथवा रिहाइशी भूमि उपयोग लिखा है सभी को उसका पालन करते हुए चाहिए और वही दिल्ली नगर निगम में शुल्क जमा कर वैध निर्माण होता है।

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