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संघ @100: बीजेपी को संघ, तो संघ को सक्रिय करने वाले शताब्दी वर्ष के बारे में जानिए सबकुछ

ठीक 2 दिन बाद यानि 2 अक्टूबर से 2026 की विजयादशमी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शताब्दी वर्ष मनाएगा। संघ के स्वयंसेवक पंच परिवर्तन- पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समसरता, स्व आधारित व्यवस्था, कुटुंब प्रबोधन और नागरिक कर्तव्य को लेकर जनजागरण करेंगे।

शताब्दी वर्ष के दौरान गृह संपर्क अभियान, हिन्दू सम्मेलन, प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठी और सामाजिक सद्भाव बैठकों का आयोजन भी किया जाएगा। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और सरसंघचालक जी की उपस्थिति में शताब्दी वर्ष का शुभारंभ होगा।  

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य को प्रारंभ होकर 100 वर्ष पूर्ण हो रहे।  विजयादशमी उत्सव का आयोजन आश्विन शुद्ध दशमी, गुरुवार, 2 अक्तूबर 2025 को सुबह 7.40 को रेशीमबाग मैदान पर आयोजित किया गया है। अवसर पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. रामनाथ कोविंद जी प्रमुख अतिथि होंगे और सरसंघचालक डॉ. मोहन जी भागवत का मार्गदर्शक उद्बोधन होगा।

डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने व्यक्ति निर्माण के लिए संगठन की स्थापना की। नागपुर के उनके घर में आयोजित पहली बैठक में 17 साथी उपस्थित थे। संघ के शुरूआती दिनों में जब संघ शाखा शुरू हुई तो तुरंत कोई शाखा नहीं आया बल्कि कुछ महीनों के बाद 17 अप्रैल, 1926 को एक बैठक में अलग-अलग नामों पर विचार हुआ और सब लोगों ने मिलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, नाम निश्चित किया। 28 मई, 1926 को पहली शाखा मोहिते बाड़ा, महल भाग में लगी, जो संघ मुख्यालय के नाम से जाना जाता है।

शाखाओं की संख्या 83 हजार से अधिक है। 32 हजार से अधिक साप्ताहिक मिलन चलते हैं। संघ का पूर्ण गणवेश में पहला पथ संचलन 1926 में हुआ। यह संचलन मोहिते बाड़ा से प्रारंभ होकर हनुमान नगर के राजाबाक्षा मंदिर तक आया। नागपुर के भोसले राजा अपने महत्त्वपूर्ण कार्यों के प्रारंभ से पहले राजाबाक्षा मंदिर के भगवान मारुति का दर्शन करते थे। महाराष्ट्र में सीमोल्लंघन का महत्त्व है, उस दृष्टि से 1926 में पहला पथ संचलन शुरू हुआ।

शुरूआती दिनों में संघ का विजयादशमी उत्सव मोहिते बाड़ा में ही होता था। शाखाओं की संख्या बढ़ने लगी तो यह यशवंत स्टेडियम में होने लगा। फिर कस्तुरचंद पार्क में होने लगा। कई सालों तक यह उत्सव उसी जगह होता रहा। 1995 से विजयादशमी उत्सव रेशीमबाग में हो रहा है।

गणवेश में स्वयंसेवकों की उपस्थिति समय के साथ बढ़ती रही। बीते साल ये संख्या 7 हजार के आसपास थी। इस साल तीन गुना बढ़ने की संभावना है। शताब्दी वर्ष के कारण अनेक स्वयंसेवक सक्रिय हुए हैं। कार्यक्रम के शुरू में शस्त्रपूजन, उसके बाद प्रदक्षिणा संचलन, योग प्रात्यक्षिक, नियुद्ध और घोष प्रात्यक्षिक होंगे।

शताब्दी वर्ष में गृह संपर्क अभियान के तहत संघ के बारे में सीधी बात लोगों से की जाएगी। शताब्दी वर्ष मे संघ का विचार, संघ का कार्य लोगों तक ले जाने के लिए खासकर कई प्रोग्राम  होंगे। हिन्दू सम्मेलन होंगे।

26, 27, 28 अगस्त को दिल्ली में संवाद सत्र के आयोजन के बाद एक और संवाद सत्र 7 और 8 नवंबर को बैंगलुरू में होगा, जिसे सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत संबोधित करेंगे। एक दिन का संवाद सत्र 21 दिसम्बर को कोलकता में होगा। अगले साल 7, 8 फरवरी को मुंबई में संवाद सत्र का आयोजन होगा। नागपुर में शिशु और बालों का विजयादशमी उत्सव 5 अक्तूबर को होगा। मणिपुर में भी विजयादशमी उत्सव की तैयारी हो रही है।

 विजयादशमी उत्सव में लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता (पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ, इंडियन आर्मी), कोयंबटूर के के. वी. कार्तिक और उनका परिवार (मैनेजिंग डायरेक्टर, डेक्कन इंडस्ट्रीज) और संजीव जी बजाज (चेयरमेन, मैनेजिंग डायरेक्टर, बजाज फिनसर्व पुणे)। साथ ही घाना, दक्षिण आफ्रीका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, यूके, यूएसए से भी कई खास लोग बुलाए गये हैं।

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