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….जब इतिहासकार की मैनुस्क्रिप्ट पब्लिसर ने लौटाई कहा; ‘अयोध्या मंदिर पर किताब छापेंगे तो कम्युनल पब्लिशर कहलाएंगे’

राज्यसभा सांसद और विख्यात इतिहासकार मीनाक्षी जैन ने बड़ा दावा करते हुए कहा  “जेएनयू और डीयू का सिलेबस अभी नहीं बदला है। पुराने इतिहासकारों को ही पढ़ाया जा रहा है। कहा कि ये वही इतिहासकार हैं जो काशी, मथुरा के बारे कुछ नहीं लिखेंगे।”

जैन ने कहा “अयोध्या के समय तब के प्रकाशक काफी दबाव में रहते थे। बीते 10 सालों में मोदी सरकार के शासन के बाद वो बदल गए हैं, उनकी मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। पहले जब मैं अयोध्या पर पुस्तक छपाने का प्रयास कर रही थी तो प्रकाशक इसे छापने से इनकार कर रहे थे। अब वही प्रकाशक मुझे किताब लिखने को कहते हैं। मेरे ख्याल से पिछले 10 सालों में यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है।”

अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी ने कहा सांस्कृतिक गुलामी से दशकों तक अभिशप्त रहने की हमारी लड़ाई, हमारा संघर्ष जारी है और मुझे लगता है सांस्कृतिक गुलामी से बाहर निकलने में हम निश्चित तौर पर सफल हुए हैं। यह देश के नवोत्थान की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।

सभ्यता के सिद्धांतों को आत्मसात किए बिना विदेश नीति अधूरी—पूर्व राजदूत सुशील सिंघल

दूसरे सत्र में वसुधैव कुटुंबकम (वैश्विक क्षेत्र में नवोत्थान) पूर्व राजदूत सुशील कुमार सिंघल ने कहा कि जब तक अपनी सभ्यता के सिद्धांतों को आत्मसात नहीं करेंगे, उसके अनुसार विदेश नीति, अनुसंधान और आर्थिक नीतियां नहीं होंगी तब तक हम औपनिवेशिकवाद का ही अनुसरण करते रहेंगे। हमें अपनी सार्वभौमिकता बढ़ाने के लिए, उसको मजबूती देने के लिए खुद के बने रास्तों पर ही चलने का संकल्प लेना होगा।

सनातन की अलख विदेशों में भी जगी—अंतरराष्ट्रीय शिल्पकार नरेश कुमावत

अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शिल्पकार नरेश कुमार कुमावत ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में शिल्पकार के तौर पर मैंने जो अनुभव किया है वह इतना ही है कि देश की सार्वभौमिकता और सनातनी परंपरा, मूर्तियों की स्थापना के रूप में जिस तरीके की मजबूती इस सरकार के दौरान मुझे देखने को मिली है वैसा पिछली सरकारों में मुझे देखने का अनुभव नहीं मिला। दूसरी बात यह कि मैं जब भी किसी विदेशी मुल्क में गया तो वहां भी सनातन की जो अलख जगी है वह पिछले 10 वर्षों की मोदी सरकार की बदौलत ही है, ऐसा मुझे प्रतीत होता दिखता है।

युद्ध के नियम बदले, भारत की नीति भी बदली—मेजर जनरल विजय शरद रानाडे

तीसरे सत्र में शस्त्रेण रक्षति: राष्ट्रे (रक्षा क्षेत्र में नवोत्थान) विषय पर वक्ता रिटायर्ड मेजर जनरल विजय शरद रानाडे ने कहा कि इस वक्त युद्ध के नियम बदल गए हैं, लिहाजा हमारी सेना की सोच भी बदली है। अभी हमारी रक्षात्मक नीति से आक्रमण नीति बदली है, दृष्टिकोण बदला है, लड़ाई की परिभाषा बदली है। भारत ने स्वतंत्रता के बाद चार लड़ाइयां लड़ीं। बालाकोट, उरी और ऑपरेशन सिंदूर में दृष्टिकोण बदला है। रक्षा क्षेत्र में अब नई तकनीक आ रही हैं। ड्रोन और मिसाइलों का युग है। सीमाओं पर युद्ध ही नहीं, अब दूर से छद्म युद्ध भी लड़ा जा रहा है।

चीन को हराना है शस्त्र से ही नहीं, शास्त्र से भी—रक्षा विशेषज्ञ राजीव नयन

रक्षा विशेषज्ञ राजीव नयन ने कहा कि हमें सामरिक रणनीति को बदलना होगा। चीन को केवल शस्त्र  से ही नहीं शास्त्र (बुद्धिमता) से भी हराना होगा। हमें आगे सजगता के साथ स्वदेशी मानसिकता और स्वदेशी यंत्रों की आवश्यकता है। बुद्धिमता और शौर्य प्रदर्शन के साथ संयम भी बरतना होगा। बिना युद्ध करे दुश्मन को समाप्त करना है तो उसे अपनी ताकत का एहसास कराना होगा।

प्रेरणा शोध संस्थान न्यास के तत्वावधान में नोएडा के सेक्टर 62 स्थित राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान में ‘प्रेरणा विमर्श 2025’  के अंतर्गत नवोत्थान के नए क्षितिज पर चर्चा में ये विचार सामने आए।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड प्रचार प्रमुख कृपाशंकर, प्रेरणा शोध संस्थान न्यास की अध्यक्ष प्रीति दादू के अलावा प्रेरणा विमर्श 2025 के अध्यक्ष अनिल त्यागी, समन्वयक श्याम किशोर सहाय, सह संयोजक अखिलेश चौधरी, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष प्रो. अखिलेश मिश्रा, प्रेरणा विमर्श 2025 की सचिव मोनिका चौहान सहित 300 से अधिक गणमान्य लोग रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका जी और डॉ. नीलम कुमारी जी ने किया।

—ख़बर यहीं तक

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