दिल्ली को घुटन से राहत दिलाने के लिए दिल्ली सरकार ने सरकार ने क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश) का बड़ा प्रयोग किया — और इस प्रयास का गवाह बन बुराड़ी का इलाका। उम्मीद है कि कुछ घंटों में बारिश की पहली बूंदें गिरेंगी। तो क्या ये बारिश इतनी होगी कि दिल्ली की धूल और धुएं खत्म होजाएंगे। आपको बता दें ये तो बारिश होने के बाद ही पता चलेगा।

IIT कानपुर की आसमानी उड़ान
मंगलवार सुबह IIT कानपुर से क्लाउड सीडिंग के लिए विशेष विमान ने उड़ान भरी।
हालांकि कानपुर में कम विजिबिलिटी (2000 मीटर) के कारण उड़ान में थोड़ी देरी हुई, लेकिन जैसे ही आसमान साफ हुआ, विमान ने दिल्ली की ओर रुख किया। उड़ान भरकर
मेरठ एयरफील्ड, खेकरा, बुराड़ी, नॉर्थ करोल बाग, मयूर विहार, सादकपुर और भोजपुर जैसे इलाकों में क्लाउड सीडिंग की है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, अगर परिस्थितियां अनुकूल रहीं, तो 2-3 घंटे में बूंदें गिरने लगेंगी।
बुराड़ी बना पहला टेस्ट ज़ोन
दिल्ली सरकार ने बुराड़ी क्षेत्र के ऊपर क्लाउड सीडिंग प्रक्रिया शुरू की।
विमान से सिल्वर आयोडाइड और सोडियम क्लोराइड जैसे छोड़े गए, जो बादलों में मिलकर बारिश के कण बनने में मदद करते हैं।
आपको बता दें कि पिछले हफ्ते हुए ट्रायल में केवल 20% नमी होने की वजह से बारिश नहीं हो पाई थी।
इस बार नमी थोड़ी बेहतर है, और विशेषज्ञों को उम्मीद है कि बारिश हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल दिल्ली की हवा में 15-20% नमी ही है, जो क्लाउड सीडिंग के लिए आदर्श स्तर से कम है।
इसके बावजूद, यह प्रयोग दिल्ली की हवा को साफ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि इस कृत्रिम बारिश से AQI स्तर में गिरावट आएगी और लोगों को जहरीली हवा से राहत मिलेगी।
आईआईटी कानपुर ने दिल्ली में किए दो क्लाउड सीडिंग ट्रायल; हल्की बारिश और प्रदूषण स्तर में गिरावट दर्ज
आईआईटी कानपुर की टीम ने सेसना विमान के ज़रिए दो बड़े क्लाउड सीडिंग ऑपरेशन पूरे किए।
• हर उड़ान में 8 केमिकल फ्लेयर छोड़े गए, जो लगभग 2 से 2.5 मिनट तक सक्रिय रहे।

“हमारा मकसद यह समझना है कि दिल्ली की मौजूदा नमी की स्थिति में कितनी बारिश को प्रेरित किया जा सकता है। हर ट्रायल से हमें विज्ञान के ज़रिए नई दिशा मिलेगी— सर्दियों के लिए भी और पूरे साल के लिए भी।” — पर्यावरण मंत्री श्री मनजिंदर सिंह सिरसा
• प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, कुछ जगहों पर पीएम2.5 और पीएम10 में मापी जा सकने वाली कमी दर्ज हुई है; दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर हल्की बारिश दर्ज की गई; वैज्ञानिक पूरे आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण करेंगे और रिपोर्ट जारी करेंगे।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा,
“दिल्ली ने प्रदूषण से लड़ाई में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। क्लाउड सीडिंग तकनीक के ज़रिए हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि वास्तविक वातावरण में कितनी कृत्रिम वर्षा संभव है। हर प्रयोग हमें विज्ञान के ज़रिए समाधान की ओर ले जाएगा।”
ऑपरेशन का विवरण:
आईआईटी कानपुर की विशेषज्ञ टीम ने आज दो उड़ानें कानपुर और मेरठ एयरफील्ड से संचालित कीं। दोनों उड़ानों ने खेकरा, बुराड़ी, नॉर्थ करोल बाग, मयूर विहार, सड़कपुर, भोजपुर और आसपास के क्षेत्रों को कवर किया।
हर उड़ान में करीब 0.5 किलो वजन वाले आठ फ्लेयर छोड़े गए, जिनमें विशेष मिश्रण था जो बादलों में नमी बढ़ाने में सहायक होता है।
ऑपरेशन लगभग डेढ़ घंटे तक चला। उस दौरान आर्द्रता 15–20% के बीच रही — यह आदर्श से थोड़ी कम थी, लेकिन वैज्ञानिक परीक्षण के लिए पर्याप्त थी।
माननीय मंत्री सिरसा ने बताया,
“विशेषज्ञों के अनुसार, सीडिंग के बाद बारिश अगले 24 घंटे के भीतर हो सकती है, यह बादलों की नमी पर निर्भर करता है। शुरुआती रिपोर्टों में दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर लगभग 0.1–0.2 मिमी की हल्की वर्षा दर्ज हुई है, जो सकारात्मक संकेत है।”
प्रारंभिक परिणाम:
दिल्ली के 20 चयनित मॉनिटरिंग स्टेशनों से प्रदूषण के आंकड़े एकत्र किए गए, जिनमें खास ध्यान पीएम2.5 और पीएम10 पर था।
• पहली उड़ान से पहले: मयूर विहार, करोल बाग और बुराड़ी में पीएम2.5 क्रमशः 221, 230 और 229 µg/m³ दर्ज हुआ। ऑपरेशन के बाद ये स्तर घटकर 207, 206 और 203 µg/m³ रह गए।
• पीएम10 का स्तर इन्हीं स्थानों पर 207, 206 और 209 µg/m³ से घटकर 177, 163 और 177 µg/m³ तक आया।
क्योंकि हवा की गति बहुत कम थी, यह गिरावट मुख्य रूप से बादलों में छोड़े गए कणों के प्रभाव से हुई, जिससे हवा में मौजूद धूलकण नीचे बैठ गए।
मंत्री सिरसा ने कहा,
“हमारे हर आंकड़े हमें स्वच्छ और हरित राजधानी की दिशा में ले जा रहे हैं। वैज्ञानिक पूरी तरह से सभी आंकड़ों का विश्लेषण कर रहे हैं और आगे इस पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर आने वाले हफ्तों में और क्लाउड सीडिंग प्रयोग किए जाएंगे। पहले चरण के बाद तय होगा कि फरवरी तक और कितनी उड़ानें की जाएं।”
उन्होंने आगे कहा,
“यह भारत में शहरी प्रदूषण नियंत्रण के लिए सबसे बड़ा वैज्ञानिक कदम है। मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में दिल्ली सरकार हर कदम पारदर्शी और विज्ञान आधारित तरीके से उठा रही है ताकि नागरिकों को स्वच्छ हवा मिल सके।”
क्या है क्लाउड सीडिंग?
क्लाउड सीडिंग एक वैज्ञानिक तकनीक है जिसमें बादलों में विशेष रासायनिक कण (जैसे सिल्वर आयोडाइड या सोडियम क्लोराइड) छोड़े जाते हैं ताकि बारिश बनने की प्रक्रिया को प्रेरित किया जा सके।
इस प्रयोग में सेसना विमान के ज़रिए खास रासायनिक फ्लेयर जलाकर बादलों में छोड़े गए। ये कण बादलों में जलकण बनने की प्रक्रिया को तेज करते हैं और उचित नमी की स्थिति में वर्षा होती है।
उचित बादलों का चयन, फ्लेयर छोड़ने का सही समय, और मौसम की बारीकी से निगरानी — ये सभी इस प्रक्रिया की सफलता के लिए बेहद ज़रूरी होते हैं। ऑपरेशन के बाद बारिश और वायु गुणवत्ता से जुड़े सभी आंकड़े एकत्र किए जाते हैं ताकि प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया जा सके।
दिल्ली सरकार की यह पहल प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में भारत की एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि है। सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी रखने और जनता को नियमित अपडेट देने के लिए प्रतिबद्ध है।
–खबर यही तक—

