दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 27 को सार्वजनिक अवकाश दे दिया और इसकी वजह भी बताई। सोमवार को इसलिए अवकाश किया जा रहा है, क्योंकि चार दिन के इस पर्व के तीसरे दिन व्रती सूर्यास्त के समय नदी या तालाब के किनारे जाकर अस्तगामी सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। यह छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन सुबह से ही तैयारी शुरू हो जाती है और पूरा परिवार किसी ने किसी कार्य को पूरा करने में लगा रहता है। मुख्यमंत्री के अनुसार इसी तथ्य को ध्यान में सरकार ने सोमवार 27 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश किया गया है।
इस बार छठ कई मायनों में अलग और ख़ास होने जा रही है। 25 अक्टूबर को नहाय-खाय की शुरूआत होने के साथ ही दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग बन रहा है जिसे भद्रावास योग कहते हैं। ये संयोग छठ पूजा को और भी शुभ बना रहा है। कई विद्वानों ने ख़ास भद्रावास योग को तीन राशियों के लिए विशेष फलदायी बताया है जिसमें सिंह, मकर और कुंभ राशि हैं।
एनसीआर में ज़ोरों पर तैयारियां-
नोएडा सेक्टर-71 स्थित छठ घाट पर सहयोग छठ पूजा समिति एवं नोएडा प्राधिकरण के सहयोग से घाट निर्माण और सजावट का काम तेजी से चल रहा है। करीब 24 सालों से श्री सहयोग छठ पूजा समिति के तत्वाधान में छठ महापर्व का आयोजन शिवशक्ति अपार्टमेंट के निवासी हर साल भव्य रूप से मनाते हैं।

नोएडा सेक्टर-71 में तैयार होता छठ घाट
सहयोग छठ पूजा समिति, सेक्टर-71, नोएडा के अध्यक्ष नीरज सिंह ने कहा कि “छठ महापर्व सूर्य उपासना और आस्था का अद्भुत संगम है। हमारा प्रयास है कि श्रद्धालुओं को पूरी सुविधा और पवित्र वातावरण मिले। इस आयोजन में समाज की सहभागिता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।”
गाजियाबाद के हिंडन घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर छठ वेदियों का निर्माण, साफ-सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए हैं।
4 दिनों तक चलेगा छठ महापर्व, किस दिन क्या होगा?
नहाय-खाय से शुरू हो गया महापर्व
25 अक्टूबर (शनिवार) को नहाय-खाय के साथ छठव्रतियों ने घरों की सफाई कर पवित्र भोजन — चावल, चना दाल और लौकी की सब्जी — का प्रसाद बनाया और ग्रहण किया। अब छठ का व्रत करने वाले पूर्ण शुद्ध माने जाते हैं और इसी के साथ ही सूर्योपासना के चार दिन व्रत छठ के लिए समर्पित हो जाएंगे।
खरना से 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत।
26 अक्टूबर को खरना में छठव्रती मिट्टी के बर्तनों में खीर-रोटी सहित पारंपरिक प्रसाद तैयार करेंगे। शाम में छठी मैया की पूजा के बाद वे प्रसाद ग्रहण करेंगे और फिर शुरू होगा 36 घंटे का निर्जला उपवास, जिसमें व्रती जल तक ग्रहण नहीं करते।
27 अक्टूबर: ढ़ल रहे सूरज को को अर्घ्य
छठ के तीसरे दिन, श्रद्धालु बांस के सूप, डाला और दौरा में फल, ठेकुआ, लड्डू, नारियल, ईख, सिंघाड़ा आदि प्रसाद सजाकर छठघाट की ओर प्रस्थान करेंगे। सूर्यास्त से पूर्व घाटों पर अस्त होते सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा। इसी शाम श्री सहयोग छठ पूजा समिति द्वारा नोएडा सेक्टर-71 के छठ घाट पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी होगा, जिसमें छठ के पारंपरिक गीतों और लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी जाएगी। हर साल यहां हज़ारों लोग इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते हैं।
28 अक्टूबर: उगते हुए सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन
महापर्व का समापन मंगलवार प्रातःकाल उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ होगा। व्रती प्रसाद से भरे सूप, डाला और दौरा लेकर घाट पहुंचेंगे और उदीयमान भगवान भास्कर की उपासना करेंगे। अर्घ्य के उपरांत व्रती पारण करेंगे और परिवार व समाज के साथ प्रसाद ग्रहण करेंगे।
ग्लोबल हो चुका है लोकआस्था का ये पर्व
छठ महापर्व आज बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों से निकलकर विश्वभर में श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। नेपाल, मॉरिशस, फिजी, सूरीनाम, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में भी प्रवासी भारतीय इस पर्व को पारंपरिक विधि-विधान से मनाते हैं। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में भी लाखों श्रद्धालु इस पर्व में सम्मिलित होते हैं।
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