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एमसीडी के साधारण कर्मचारियों को भी पुलिस से उठवाकर भाजपा ने अति कर दी….अंकुश नारंग

पिछले एक महीने से समान वेतन समेत तीन मांगों को लेकर सिविक सेंटर के बाहर हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों को ने धरना स्थल से जबरन उठा दिया और कइयों को हिरासत में ले लिया गया।

एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने आरोप लगाया कि हड़ताल में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी शामिल थे, फिर भी महापौर राजा इकबाल सिंह के इशारे पर पुलिस ने उन्हें जबरन हटवा दिया। आप” सरकार ने डीबीसी कर्मचारियों को एमटीएस बनाया, लेकिन भाजपा की सरकार उन्हें समान वेतन नहीं दे रही है। मेयर ने कर्मचारियों को कमेटी का झुनझुना तो पकड़ा दिया, लेकिन कमेटी ने अभी तक समस्या का समाधान नहीं किया।

अंकुश नारंग ने कहा कि गुरुवार को सुबह-सुबह पिछले 32 दिनों से हड़ताल पर बैठे एमसीडी के मल्टी-टास्किंग स्टाफ (एमटीएस) कर्मचारी जबरन उठा लिए गए। उनकी छोटी सी मांगों पर भी महापौर के कानों पर जूं नहीं रेंग रही है, लेकिन भाजपा की पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा कि आज ये कर्मचारी सिविक सेंटर के गेट नंबर पांच के बाहर ही बैठे थे, जहां उनका बैठने का अधिकार है। वे वहीं अपनी नौकरी करते हैं, वहीं अपने अधिकारों के लिए 32 दिनों से लड़ रहे थे। इन कर्मचारियों ने एमसीडी को 25-30 साल दिए, उन्हें अपना परिवार माना, लेकिन भाजपा ने अपनी पुलिस से उन्हें जबरन उठवा दिया। भाजपा और महापौर राजा इकबाल सिंह को शर्म आनी चाहिए कि एमसीडी कर्मचारियों और महिलाओं को जबरन उठा रहे हैं और अलग-अलग पुलिस थानों में भेज रहे हैं। पहले तो भाजपा के लोग ईडी, सीबीआई लगाते थे व पुलिस से पकड़वाते थे और नेताओं को ही उठवाते थे, लेकिन आज तो उन्होंने एमसीडी के साधारण कर्मचारियों को भी पुलिस से उठवाकर अति कर दी।

अंकुश नारंग ने कहा कि कर्मचारियों की सिर्फ तीन जायज मांगें हैं। पहली, 2024 में उन्हें डीबीसी से एमटीएस का सेंशन पोस्ट दिया। अब वे कहते हैं कि न्यूनतम ग्रेड पे और वेरिएबल डीए के साथ 27,900 रुपये दें।

दिल्ली जैसे महंगे शहर में वे अपना गुजारा कैसे करें? बच्चे स्कूल कैसे भेजें? किराया कैसे दें? दूसरी मांग है कि कंपेंसेटरी ग्राउंड पर, अगर उन्हें कुछ हो जाए तो परिवार के किसी सदस्य को नौकरी मिले। इसमें भाजपा सरकार का क्या खर्चा हो रहा है? तीसरी मांग है कि 25-30 साल की निष्ठा के बाद कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को जो अर्न लीव और मेडिकल लीव मिलती हैं, वही उन्हें भी दें। क्या इसमें कुछ गलत है?

अंकुश नारंग ने कहा कि 14 अक्टूबर को सदन में महापौर ने कमेटी का झुनझुना दिखाकर कहा था कि 24-48 घंटे में फैसला हो जाएगा। आज 17 दिन बीत चुके हैं। कमेटी दो बार बुलाई गई, लेकिन हर बार वे उनकी मांगें पूछते हैं, फिर कहते हैं कि 33,000 कर्मचारियों को कवर करना पड़ेगा। अधिकारी गुमराह कर रहे हैं। कुल कर्मचारी 9,000 हैं, जिनमें एमटीएस करीब 4,200-4,300 हैं। इसमें सिर्फ 41 करोड़ रुपए का खर्चा है। चार इंजन वाली भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए। अगर महापौर राजा इकबाल सिंह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर 41 करोड़ नहीं ला सकते, तो ऐसी भाजपा सरकार का क्या फायदा? उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता एक तरफ कहती हैं कि बजट खूब है, दूसरी तरफ एमटीएस कर्मचारी समान वेतन की मांग को लेकर सड़क पर हैं, जिसमें महज 41 करोड़ रुपए ही खर्च होगा।

उधर, “आप” मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर एमसीडी के सह प्रभारी प्रवीण कुमार ने कहा कि भाजपा का तानाशाही रवैया एक बार फिर दिल्ली में सामने आया है। इस बार यह तानाशाही अपनी ही सरकार के अधीन संचालित नगर निगम (एमसीडी) के कर्मचारियों के विरुद्ध अपनाई जा रही है। करीब 5,000 एमटीएस (मल्टी-टास्किंग स्टाफ) कर्मचारी पिछले एक महीने से सिविक सेंटर के सामने शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। अपनी वैध मांगों को लेकर वे लगातार भाजपा के आला नेताओं से संपर्क साध रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री, मेयर तथा एमसीडी की स्थायी समिति के अध्यक्ष सहित सभी संबद्ध अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने की कोई कसर नहीं छोड़ी। हर दरवाजे पर हाथ जोड़कर प्रार्थना की, लेकिन भाजपा ने उनकी एक न सुनी। इसके विपरीत, आज भाजपा ने पुलिस बल तैनात कर इनका शांतिपूर्ण धरना जबरन समाप्त करवा दिया और सभी एमटीएस कर्मचारियों को 12 विभिन्न थानों में गिरफ्तार कर लिया।

प्रवीण कुमार ने कहा कि आखिर ये कर्मचारी कौन सा इतना बड़ा षड्यंत्र रच रहे थे, जिसके लिए दिल्ली के 12 थानों की पुलिस को लगाना पड़ा? ये वही कर्मचारी हैं, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली की रक्षा की। सैनिटाइजर का छिड़काव कर शहर को संक्रमण से बचाया, डेंगू-मलेरिया जैसी महामारियों से निपटने में दिन-रात एक कर दिए। ये दिल्ली की साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुरक्षा के योद्धा हैं, जो लगातार सेवा में तत्पर रहते हैं। ऐसे कर्मचारियों को सलाखों के पीछे धकेलना पूर्णतः गैरकानूनी और अमानवीय है। शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन तो किसी भी कर्मचारी या नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन भाजपा को इनकी सच्चाई की आवाज बर्दाश्त नहीं हुई।

प्रवीण कुमार ने कर्मचारियों की मांगों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मांगें अत्यंत जायज, वाजिब और सरल हैं। ये एमटीएस कर्मचारी पहले डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर (डीबीसी) के रूप में कार्यरत थे, जिनका कोई स्थायी रिकॉर्ड या सुरक्षा नहीं थी। जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई, तो इन्हें पहली बार एमटीएस का दर्जा प्रदान किया गया, जिससे इन्हें स्थायीकरण की उम्मीद जगी। लेकिन भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद फिर वही पुरानी चालें चली गईं। समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत तोड़ा गया। कुछ कर्मचारियों को 16,000 रुपये, कुछ को 20,000, तो कुछ को 24,000 रुपये तक का भेदभावपूर्ण वेतन दिया जा रहा है। यह अन्यायपूर्ण है। कोई बच्चा भी बता देगा कि एक ही काम के लिए एक समान वेतन होना चाहिए। भाजपा सरकार को यह बुनियादी बात भी समझ नहीं आ रही।

प्रवीण कुमार ने कहा कि आज भाजपा ने अत्यंत घातक कदम उठाया और धरना समाप्त कराकर कर्मचारियों को 12 थानों में बांटकर गिरफ्तार कर लिया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों का खुला उल्लंघन है। दिल्ली में यह तानाशाही लगातार जारी है। चार इंजन की सरकार होने के बावजूद, कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाएं शून्य हैं और लोगों की आवाज दबाने का सिलसिला थम नहीं रहा है। आम आदमी पार्टी इसकी कड़ी निंदा करती है। हम मांग करते हैं कि सभी कर्मचारियों को तत्काल रिहा किया जाए, उनकी सभी वैध मांगें पूरी हों और वे सड़कों पर न उतरें, बल्कि खुशी-खुशी अपने कर्तव्यों पर लौटें। आम आदमी पार्टी एमटीएस कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनकी हक की लड़ाई में हमेशा आवाज बुलंद करती रहेगी।

इस दौरान एमसीडी सह-प्रभारी प्रीति डोगरा ने कहा कि आज दिल्ली में एक अत्यंत शर्मनाक घटना घटी है। हमारे 5,000 एमटीएस कर्मचारियों को गिरफ्तार कर लिया गया, जिनमें महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं। इन्हें अलग-अलग थानों में बांट दिया गया। क्या भाजपा को लगता है कि ये आतंकवादी हैं? ये तो केवल अपने हक की मांग कर रहे थे। शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे थे। आज उनके धरने का 34वां दिन था, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इस दौरान दिवाली, छठ पूजा आई, अनगिनत त्योहार बीत गए। इन कर्मचारियों के सभी उत्सव काले पड़ गए। दिवाली वाले दिन भी वे अपने छोटे-छोटे मासूम बच्चों के साथ धरने पर बैठे रहे, उम्मीद में कि शायद प्रशासन त्योहार के रूप में इनकी मांगें पूरी कर दे। लेकिन भाजपा ने ऐसा कुछ नहीं किया।

प्रीति डोगरा ने कहा कि भाजपा अपने मंचों पर स्वच्छ भारत अभियान का गुणगान करती फिरती है, लेकिन जब स्वच्छता के ये सच्चे योद्धा (एमसीडी के एमटीएस कर्मचारी) सड़कों पर उतरते हैं, तो इन्हें थानों की सलाखें और गिरफ्तारी ‘उपहार’ में मिलती हैं। ये वही कर्मचारी हैं, जिन्होंने कोरोना महामारी के संकटकाल में, जब पूरा विश्व त्राहिमाम कर रहा था, दिल्ली को अपनी सेवाओं से सुरक्षित रखा। चिकनगुनिया, मलेरिया, डेंगू जैसी महामारियों के दौरान रखरखाव का सारा दारोमदार इन्हीं पर होता है। भाजपा का राजनीतिक अहंकार और गुरूर ने उसे इतना अंधा बना दिया है कि वह भूल गई है कि यदि ये कर्मचारी घरों में बैठ जाएं, तो दिल्ली का क्या हाल हो जाएगा। आखिर भाजपा सरकार कब इस भेदभाव को समाप्त करेगी? कब इन एमटीएस कर्मचारियों की मांगें पूरी होंगी?

आम आदमी पार्टी यह मांग करती है कि एमटीएस कर्मचारियों की जायज़ और लंबे समय से लंबित मांगों को भाजपा की चार इंजन सरकार बिना देरी के पूरा करे। एमटीएस कर्मचारी दिल्ली के विकास की रीढ़ हैं उनके हक़ और सम्मान की लड़ाई में आम आदमी पार्टी का हर कार्यकर्ता उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है।
भाजपा सरकार की तानाशाही और संवेदनहीन रवैये के बावजूद “आप” परिवार एमटीएस कर्मचारियों की आवाज़ बनकर उनके अधिकारों की इस लड़ाई को अंत तक लड़ता रहेगा।

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