हर मीटर खादी = एक घर में उजाला, एक कारीगर को सहारा
“खादी हमारे देश की आत्मा है — इसे प्रमोट करना मतलब रोजगार और पर्यावरण दोनों की रक्षा करना है।”
— श्री मनजिंदर सिंह सिरसा, उद्योग मंत्री, दिल्ली
INA दिल्ली हाट में खादी उत्सव 2025 (वस्त्रकथा 2.0) का भव्य आयोजन हुआ, जहां दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने खादी को ‘गर्व की पहचान’ बताते हुए दिल्लीवासियों से अपील की — “इस दिवाली विदेशी नहीं, स्वदेशी वाली दिवाली मनाएं।” मंत्री ने कहा कि खादी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि मेहनतकश हाथों की इज़्ज़त और पर्यावरण की सुरक्षा है। “जब हम खादी पहनते हैं, हम धरती को राहत देते हैं और गांवों को रोज़गार।” उन्होंने यह भी बताया कि फैशन इंडस्ट्री दुनिया की दूसरी सबसे प्रदूषणकारी इंडस्ट्री है, जबकि खादी टिकाऊ, हाथ से बनी और प्रकृति के अनुकूल है।
डिजिटल इंडिया + स्वदेशी इंडिया
सिरसा ने कारीगरों से हस्तनिर्मित शॉल, दीये और पश्मीना खरीदकर UPI से भुगतान किया — जिससे डिजिटल और कैशलेस व्यापार को बढ़ावा मिला।
“हर स्वदेशी खरीद एक कारीगर के घर में दीप जलाती है।”
युवा शक्ति ने खादी को रैंप पर उतारा
मिरांडा हाउस, हिन्दू कॉलेज, खालसा कॉलेज और ATDC के छात्रों ने खादी फैशन शो प्रस्तुत किया —
- “धरोहर – द हेरिटेज वीव”
- “ईस्ट टू वेस्ट – फ्यूज़न ऑफ ट्रडिशन एंड एम्पावरमेंट”
- “खादी बियॉन्ड बाउंड्रीज़”
- “फैब्रिक ऑफ इंडिया”
- “जोड़”
- “ब्लैक एंड व्हाइट सागा”
खादी उत्सव 15 अक्टूबर तक
100+ स्टॉल्स पर हैंडलूम परिधान, ज्वेलरी, सजावटी वस्तुएं और पारंपरिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध हैं।
यह आयोजन दिल्ली सरकार की उस नीति का हिस्सा है जिसमें खादी को औद्योगिक विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का केंद्र बनाया गया है।
—समाप्त—


1 comment
Хорошая заметка, вот буквально вчера вечером изучал по этому вопросу!!!