देश की संस्कृति और त्यौहारों से आम-जनजीवन में खुशी या उल्लास ही नहीं बढ़ता बल्कि बीमारियों की संख्या भी घट जाती है। यकीन करिए बीते सालों के मुकाबले इस बार नवरात्र, दशहरा, दीपावली और छठ काफी पहले (अक्टूबर की शुरूआत) आ गए ऐसे में कई दिन पहले से ही लोगों ने घर की सफाई करना शुरू कर दिया पुराने गमले और कूलर के पानी बदल देते हैं। इसका सीधा असर जल जनित बीमारियों के इंफेक्शन पर पड़ा।
जल्दी आए त्यौहार, कम हुए डेंगू के केस!
दिल्ली नगर निगम पब्लिक हेल्थ विभाग के सूत्रों के मुताबिक अभी तक डेंगू के 557 केस दर्ज हुए हैं जबकि साल 2024 में अभी तक यह आंकड़ा 578 का था। जबकि मलेरिया के 264 चिकनगुनिया के 42 मामले दर्ज हुए हैं जबकि पिछले साल मलेरिया के 237 और चिकनगुनिया के 30 मामले दर्ज हुए थे (2024: मलेरिया 237, चिकनगुनिया 30) साफ है डेंगू के मामले कम हुए हैं।
एक खतरा टला दूसरा सामने
लोगों ने त्यौहारों की वजह से साफ-सफाई बढ़ा दी ऐसे में पानी का सोर्स खत्म होते ही डेंगू के मच्छर पैदा नही हो पाते। यही वजह है डेंगू के मामले कम दर्ज हुए। हालांकि यमुना में पानी भले ही घट गया बाढ का खतरा टल गया फिर भी जहां जहां पानी भरा था वहीं पर डेंगू के लार्वा पैदा होने का सबसे ज्यादा खतरा है।
अगस्त के बाद, दिल्ली में मच्छर जनित बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ जाती है और सितंबर और अक्टूबर में यह सबसे ज़्यादा होती है।
कोरोना के बाद अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में चलेंगे ड्रोन
सोनिया विहार, वासुदेव घाट, अशोक नगर, यमुना बाजार और गढ़ी मांडू ऐसे निचले इलाके में हैं जो बाढ़ के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं लेकिन इन्हीं इलाकों में बहुत ऐसी गलियां हैं जहां पर प्रेशर जेटिंग मशीनों के पहुंचने में काफी दिक्कत होती है लिहाजा डेंगू को खत्म करने वाली दवा के छिड़काव के लिए अब ड्रोन चलेंगे। इससे पहले ड्रोन कोरोना काल में ही चले थे।
निगम अधिकारी के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों में मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निगम ने एक विशेष टीम तैनात की है। अब तक मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए निगम का आंकडा कहता है कि अब तक 4329 बाढ़ प्रभावित घरों में फॉगिंग, 1346 जगहों पर मच्छर रोधी दवा का छिड़काव हुआ। 136 कर्मचारियों वाली स्पेशल टीम इस अभियान में लगी है।

