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आज से दिल्ली सहित देश भर में शादियों का सीजन शुरू- दिल्ली में हुई आज 50 हज़ार शादियाँ

आज देवउठनी एकादशी के पावन अवसर पर दिल्ली में लगभग 50,000 शादियाँ संपन्न हुई है और आज से ही अगले 16 दिसंबर तक शादियों के सीजन का पहला चरण पूरा होगा। आज शादियों के सीजन का पहला दिन है, जो 18 दिनों तक चलेगा। इस अवधि में पूरे देश में लगभग 48 लाख शादियाँ होने का अनुमान है जबकि दिल्ली में यह आँकड़ा 4.5 लाख शादियों का है, जो व्यापारिक गतिविधियों में जबरदस्त वृद्धि लाएगा और अगले एक महीने से अधिक समय तक दिल्ली तथा पूरे देश में गाजे बाजे की आवाज़ सुनाई देगी। आज दिल्ली एवं देश भर के विभिन्न राज्यों के मंदिरों एवं अन्य अनेक स्थानों पर तुलसी विवाह भी संपन्न हुए। तुलसी का पौधा सीधा भगवान विष्णु से संबंधित होता है और देवउठनी एकादशी पर देशभर में भगवान श्री विष्णु के शालिग्राम स्वरूप का विवाह तुलसी माता से करवाया जाता है जिसे बहुत शुभ माना गया है।

कनफ़ेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ( कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री तथा चाँदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि पुराणों के अनुसार देवउठनी एकादशी को भगवान श्री विष्णु चार माह की निद्रा के बाद जागते हैं तथा देव के उठने के बाद से ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है और इसीलिए इस दिन से शादियों के शुभ मुहूर्त भी शुरू होते हैं।शादी के सीजन में कपड़े, आभूषण, सजावट, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, उपहार और खानपान जैसी विभिन्न श्रेणियों के व्यापार में बड़ी वृद्धि होती है वहीं बड़ी मात्रा में विभिन्न प्रकार के सेवा प्रदाताओं को भी बड़ा व्यापार मिलता है वहीं बड़े पैमाने पर रोज़गार के अवसर भी मिलते हैं। कैट के एक अनुमान के अनुसार, इस शादी के सीजन में व्यापार से लगभग 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार होगा जो देश के आर्थिक एवं सामाजिक ढाँचे को मजबूत करेगा।श्री खंडेलवाल ने कहा कि यह सीधे तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था में “ सनातन अर्थव्यवस्था” के महत्वपूर्ण प्रतिभाग को दर्शाता है

खंडेलवाल ने कहा कि यह शादी का सीजन न केवल व्यापारियों के लिए बल्कि अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। हम आशा करते हैं कि यह सीजन सभी व्यापारियों और लोगों के लिए सुखद एवं समृद्धि लाने वाला होगा।

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भरतिया ने कहा कि शादी के सीजन में कारोबार की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए देशभर के व्यापारियों ने व्यापक तैयारियां की हैं। ग्राहकों की संभावित भीड़ को देखते हुए व्यापारी अपने यहां सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विवाह का लगभग 20 प्रतिशत खर्च दूल्हा-दुल्हन पक्ष को जाता है जबकि 80 प्रतिशत खर्च विवाह संपन्न कराने में काम करने वाली अन्य तीसरी एजेंसियों को जाता है इसीलिए शादियों के सीजन में की गई ख़रीदी व्यापार में वित्तीय तरलता बनाए रखती है

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