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दिल्ली नगर निगम के सबसे पावरफुल चुनाव में कभी केजरीवाल के साथ रहे 16 पार्षदों ने रचा सियासी तिलिस्म, क्या तीसरी बार भी AAP हार जाएगी?

पहले दिल्ली से आदमी पार्टी चुनाव हार कर विपक्ष में चली गई, दूसरे झटके में निगम की सत्ता में होकर भी मेयर की कुर्सी बीजेपी को चली गई और अब किस्मत का सितम देखिए
खुद आप के 16 पार्षदों ने नई इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी बनाकर ऐसी सियासी व्यूह रचना की है कि अब सबसे पावरफुल कमेटी स्टैंडिंग का चुनाव जीतना भी आम आदमी पार्टी के लिए बहुत आसान नहीं। यानी व्यूह रचना कामयाब हुई तो एक तरफ तीन साल बाद सबसे पावरफुल स्टैंडिंग कमेटी बनेगी तो दूसरी ओर आम आदमी पार्टी को तीसरा सबसे बड़ा सियासी झटका लगेगा।

अब तय हो गया है कि वार्ड कमेटी के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के चुनाव के साथ स्टैंडिंग कमिटी का गठन भी लगभग तय है। स्टैंडिंग कमेटी के 2 खाली सदस्यों की सीट को भरने के लिए चुनाव आज यानी 2 जून को सिविक सेंटर में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक है।

16 पार्षदों के टूटने से ऐसे कमजोर हो गई आप

आप पार्टी के 16 पार्षदों के नई पार्टी इंद्रप्रस्थ विकास नाम से बनाने के बाद निगम सदन में आम आदमी पार्टी बचे सिर्फ 97 पार्षद। 16 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी( IVP) के, बीजेपी के 117 पार्षद हुए। सियासी चक्रव्यूह में बीजेपी और IVP में सियासी गठबंधन है लेकिन दोनों ने आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। अगर बीजेपी और IVP के पार्षदों को जोड़ लें तो दोनों के कुल पार्षदों की संख्या 133 हो जाती है।

स्टैंडिंग कमिटी के चुनाव में ये होंगे वोटर

दो सदस्यों में से एक सदस्य का चुनाव सदन से होगा यानी उसमें सभी पार्षद वोट करेंगे बाकी का चुनाव जोन से होगा।

नंबर गेम से डिकोड होगा बीजेपी,IVP का सियासी तिलिस्म

स्टैंडिंग कमेटी की एक स्थायी सदस्य के चुनाव में नंबर गेम के लिहाज से कुल
मौजूदा पार्षदों की संख्या
238 है। जबकि
आम आदमी पार्टी और बीजेपी को उम्मीदवार जिताने के लिए 120 वोट चाहिए।

16 पार्षदों के नई पार्टी बनाने के पहले बीजेपी के पास 117 पार्षद थे। आप के पास 113 पार्षद थे। अगर आम आदमी पार्टी के 16 पार्षद नहीं टूटते तो कुछ भी हो सकता था। तब सत्ता की चाभी कांग्रेस पार्षद अपने हाथ में रखते लेकिन उनकी मुख्य भूमिका को छीन ली IVP ने। तिलिस्म में एक बात आप को भी समझ में आ गई है कि आम आदमी पार्टी को छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले 16 पार्षदों का वोट बीजेपी को जाएगा ये आधिकारिक घोषित भले न हो बल्कि तय माना जा रहा है।

जोन से चुनें जाने वाले दो स्टैंडिंग कमेटी मेंबर का नंबर गेम

सिटी सदर पहाड़गंज से एक सदस्य का चुनाव होना है आम आदमी पार्टी के पास पूरे वोट हैं लेकिन बीजेपी ने यहां से अपना उम्मीदवार भी नहीं उतारा है। मतलब आप का कैंडिडेट निर्विविरोध चुना जा सकता है।

साउथ जोन में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के पास बराबर बराबर 10 वोट है लेकिन इससे पहले वाले चुनाव में इस
जोन से आपका चेयरमैन था। इस बार आम आदमी पार्टी छोड़ने वाले 16 पार्षद बीजेपी के साथ हैं ऐसे में बीजेपी को साउथ जोन में जीत के लिए सिर्फ एक वोट चाहिए। जो पा लेना बीजेपी के लिए संभव लगता है।

जोन चुनाव में केजरीवाल को झटका देगी IVP

इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी ने आम आदमी पार्टी के लिए इस चुनाव में बहुत मुश्किल पैदा कर दी है। आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा झटका इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी और बीजेपी के बीच अघोषित गठबंधन होने की वजह से दिल्ली नगर निगम के 12 जोन में से 10 जो न में बीजेपी का पलड़ा भारी लग रहा है।

सिटी सदर पहाड़गंज और करोलबाग जोन को छोड़ दिया जाए तो बाकी 10 जोन में आम आदमी पार्टी के लिए राह आसान नहीं है। क्योंकि वार्ड कमियों में 7 में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत है।

रोहिणी और वेस्ट जोन में आम आदमी पार्टी के ही नाराज पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी बना चुके हैं। इन दोनों जोन में बहुमत वाली आम आदमी पार्टी का संख्या बल घट जाता है।

रोहिणी जोन में कुल पार्षदों की संख्या 23 है जिसमें बीजेपी के पास 8 पार्षद हैं बाकी बचे आम आदमी पार्टी के 15 पार्षदों में से कुछ IVP में शामिल हो चुके हैं। इस जोन में बीजेपी खुद चुनाव ना लड़कर IVP के लिए जीत सुनिश्चित करवा रही है।

वेस्ट जोन में कुल 25 पार्षदों में से भाजपा के पास सिर्फ 5 पार्षद थे । लेकिन अब आम आदमी पार्टी के कई पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी जॉइन कर चुके हैं। इस जोन में भी बीजेपी खुद चुनाव ना लड़कर इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी को जितवा रही है।

पावरफुल स्टैंडिंग कमेटी में बीजेपी के 9 सदस्य हैं। जिसमें जोन से चुनें जाने वाले 7 और सदन से दो चुने जा चुके हैं। बीजेपी का सदन से एक और सदस्य का चुना जाना तय है। अगर ऐसा हुआ तो चुने गए सदस्यों की संख्या 10 हो जाएगी। स्टैंडिंग कमिटी चुनाव जीतने के लिए यह मेजिक नंबर है। मौजूदा समीकरण के तहत अगर साउथ जोन से भी 1 सदस्य को जोड़ लें तो बीजेपी के कुल सदस्य 11 हो जाएंगे यानी बहुमत से एक ज्यादा।

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