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साहिबी नदी के दोनों किनारों पर नए सड़क कॉरिडोर से दिल्ली होगी प्रदूषण मुक्त, दिल्ली के बड़े इंफ्रा बूस्ट की हर डिटेल यहां पढ़ें-

जिसे आप नजफगढ़ नाला  कहते हैं उसे कभी साहिबी नदी कहते थे। ये पहले सीधे यमुना नदी में गिरती थी।

वक्त के साथ इसका बहाव धीमा होकर खत्म हो गया तो नदी नाले में तब्दील हो गई। अब यह नाले के रूप में अरावली पहाड़ी से निकलने वाली एक नदी है. यह नदी राजस्थान हरियाणा और दिल्ली में बहती है, इसके जल का मुख्य जल स्त्रोत वर्षा का पानी है। दिल्ली की नवगठित सरकार ने साहिबी नदी के दोनों किनारों पर धांसा से वसई दारापुर तक एक सड़क कॉरिडोर विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। ये दिल्ली को आधुनिक सड़क नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। यह नई सड़कें राजधानी में ट्रैफिक का बोझ कम करेंगी और वैकल्पिक मार्ग के रूप में काम करेंगी।  वहीं दिल्ली की चार प्रमुख PWD सड़कों को अब आधिकारिक रूप से NHAI को सौंप दिया गया है।

ये सड़कें हैं:

       •             दिल्ली-रोहतक रोड (NH-10): पीरागढ़ी से टिकरी बॉर्डर (13.2 किमी)

       •             दिल्ली-रोहतक रोड (NH-10): पीरागढ़ी से जखेरा (6.8 किमी)

       •             NH-2 (मथुरा रोड): आली गांव से रिंग रोड, आश्रम जंक्शन (7.5 किमी)

       •             NH-148A (एमजी रोड): 8 किमी का खंड

यूटी-स्तरीय समन्वय समिति की पहली बैठक ये तय किया गया कि NH-48 से नारायणा के लिए समर्पित स्लिप रोड बनेगी। धौला कुआं मेट्रो स्टेशन के पास स्थित पुलिस स्टेशन को स्थानांतरित कर NH-48 से नारायणा के लिए एक समर्पित स्लिप रोड बनाई जाएगी। ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी।

PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि *“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में, दिल्ली को एक आधुनिक, सुव्यवस्थित और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे से सुसज्जित करने के लिए सरकार पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। साहिबी नदी किनारे नया कॉरिडोर राजधानी की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। यह परियोजना दिल्लीवासियों को जाम की समस्या से राहत देने के साथ-साथ एक वैकल्पिक यातायात मार्ग भी प्रदान करेगी।

इसके अलावा, दिल्ली की चार प्रमुख सड़कों को NHAI को सौंपने का निर्णय सड़क प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाएगा। इन सड़कों के विकास और रखरखाव में तेजी आएगी, जिससे दिल्ली की कनेक्टिविटी और यातायात व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी। सरकार दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को अगले स्तर पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”*

उच्च स्तरीय समिति की बैठक में कौन-कौन रहा शामिल?

दिल्ली के बुनियादी ढांचे को अमलीजामा पहनाने के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति की पहली बैठक में PWD मंत्री, GNCTD; ACS/प्रिंसिपल सेक्रेटरी (PWD), GNCTD; डिविजनल कमिश्नर-कम-ACS/प्रिंसिपल सेक्रेटरी (Revenue), GNCTD; MCD कमिश्नर; ACS/प्रिंसिपल सेक्रेटरी (Environment & Forest), GNCTD; ACS/प्रिंसिपल सेक्रेटरी/सेक्रेटरी (Power), GNCTD; दिल्ली जल बोर्ड के CEO; कमिश्नर (Planning), DDA; एनएचएआई, दिल्ली के क्षेत्रीय अधिकारी; और PWD के इंजीनियर-इन-चीफ शामिल रहे।

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