अंकुश नारंग ने कहा कि आज एमसीडी मुख्यालय सिविक सेंटर में ढाई साल बाद पहली अहम स्थायी समिति सदस्य की मीटिंग हुई, लेकिन देश का चौथा स्तंभ (मीडिया) को भाजपा ने मीटिंग को कवर करने की अनुमति नहीं दी। भाजपा दिल्ली की जनता के लिए एजेंडा पास करना चाहती है या भाजपा खुद अपने एजेंट पास कर रही थी। जिसके चलते आज स्थायी समिति मीटिंग में मीडिया को अनुमति नहीं दी गई। भाजपा ने हमेशा लोकतंत्र की हत्या की है और अब एमसीडी में आते ही अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। आज स्थायी समिति सदस्य की मीटिंग तो हई। लेकिन मीटिंग से मीडिया को बाहर रखा गया। क्या ये लोकतंत्र की हत्या नहीं है?
आप’’ सरकार ने पार्षदों के लिए 1.55 करोड़ पास किया था लेकिन भाजपा सरकार ने दिए सिर्फ 25 लाख -अंकुश नारंग*
सत्या शर्मा ने सफाई व्यवस्था, कंसेशनरी समेत किसी भी समस्या का एजेंडा शामिल नहीं किया। एमसीडी के चारों जोन में सफाई व्यवस्था बदहाल है। फिर भी बीजेपी टिंपर की संख्या लगातार कम करती जा रही है।
अंकुश नारंग ने शुक्रवार को कहा कि ढाई वर्ष बाद स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग हो रही है। भाजपा नहीं चाहती थी कि स्टैंडिंग कमेटी बने, लेकिन आम आदमी पार्टी ने इसे बनवाया। जब से “आप” विपक्ष में आई है, उसने सकारात्मक भूमिका निभाई है। पहले भाजपा सदन में सिर्फ हंगामा करती थी और ऐसी हरकतें करती थी, जिनका दिल्ली की जनता से कोई लेना-देना नहीं था। उन्होंने हाउस और स्टैंडिंग कमेटी को चलने नहीं दिया, लेकिन “आप” विपक्ष में रहते हुए भी सकारात्मक भूमिका अदा कर रही है।
आज स्टैंडिंग कमेटी की पहली मीटिंग में मुझे यह उम्मीद थी कि सैनिटेशन, कंसेशनरी और जोनों में सफाई व्यवस्था की समस्याओं पर चर्चा होगी। लेकिन एजेंडे में न तो सैनिटेशन का मुद्दा शामिल किया गया, न कंसेशनरी का और न ही एजेंसी के कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल का। सेंट्रल, साउथ और वेस्ट जोन की स्थिति बदहाल है, जहां सड़कों पर कूड़ा ही कूड़ा पड़ा है। कूड़ा उठाने के लिए गाड़ियां नहीं आ रही हैं और सड़कों पर कूड़ा बिखरा हुआ है।
अंकुश नारंग ने कहा कि मैंने सदन में सेंट्रल जोन की कूड़े की समस्या उठाई थी और मेयर ने ऑन रिकॉर्ड कहा था कि स्टैंडिंग कमेटी बनने के बाद यह मुद्दा हल हो जाएगा। लेकिन अब स्टैंडिंग कमेटी बनने और पहली मीटिंग होने के बावजूद इस मुद्दे को एजेंडे में शामिल नहीं किया गया। मैंने पहले भी चेतावनी दी थी कि अगर स्टैंडिंग कमेटी की पहली मीटिंग में भी यह मुद्दा उठाया गया, तो समाधान में तीन महीने लग सकते हैं। लेकिन इस बार तो एजेंडा में यह मुद्दा लाया ही नहीं गया, जो बहुत शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग के दौरान कहा कि सेंट्रल जोन और साउथ जोन में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। खासकर सेंट्रल जोन की स्थिति अत्यंत खराब है, जहां पहले कुछ वल्नरेबल पॉइंट्स हुआ करते थे, लेकिन आज सड़कों पर कूड़ा ही कूड़ा फैला हुआ है। सेंट्रल जोन में पिछले दो वर्षों से कोई कंसेशनरी एजेंसी नहीं है। मैंने उम्मीद जताई थी कि स्टैंडिंग कमेटी के एजेंडे में यह मुद्दा जरूर उठाया जाएगा। मैंने हाउस में भी यह बात उठाई थी और मेयर ने कहा था कि स्टैंडिंग कमेटी में इस पर चर्चा होगी। लेकिन यह मुद्दा आज के एजेंडे में शामिल नहीं हुआ।
सेंट्रल, वेस्ट, साउथ और अब सिविल लाइन जोन में टिपर की संख्या दिन- प्रतिदिन कम होती जा रही है। सेंट्रल जोन में जहां पहले 10 टिपर हुआ करते थे, वहां अब केवल दो हैं और जहां 15 टिपर थे, वहां अब सिर्फ तीन हैं। सिल्ट उठाने वाली टाटा 407 गाड़ियां सभी वार्डों से हटा ली गई हैं। नालियों की सफाई के बाद निकलने वाली सिल्ट को उठाने के लिए कोई वाहन या टिपर उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण सेंट्रल जोन में सफाई व्यवस्था बदहाल है।
वेस्ट जोन में भी टिपर बहुत पुराने हो चुके हैं। ये टिपर एक-डेढ़ घंटे चलने के बाद खराब होकर खड़े हो जाते हैं। दिल्ली की जनता पार्षदों से सबसे पहले यही अपेक्षा करती है कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो। चारों जोनों, खासकर सेंट्रल जोन में, जहां दो वर्षों से कोई एजेंसी नहीं है, इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार किया जाए। सेंट्रल जोन में 25 में से केवल सात पार्षद “आप” के हैं।
नारंग ने बजट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब आम आदमी पार्टी सत्ता में थी, तब उन्होंने हर काउंसलर के लिए 1.55 करोड़ रुपये का बजट पास कराया था, लेकिन अब केवल 25 लाख रुपये दिए जा रहे हैं, जो पर्याप्त नहीं है। काउंसलर जनता के लिए सबसे ज्यादा सुलभ होता है और जनता उनसे ही सड़क, सफाई और अन्य समस्याओं के समाधान की उम्मीद करती है। लेकिन 25 लाख रुपये का बजट इन जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है। दिल्ली, केंद्र, उपराज्यपाल और एमसीडी, सभी भाजपा की है, फिर भी स्वीकृत कॉलोनियां, अनधिकृत कॉलोनियां और जेजे झुग्गियों व कॉलोनियों के लिए कोई बजट नहीं आया।
नारंग के आरोपों पर पलटवार करते हुए दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है की जिस आम आदमी पार्टी ने ढाई वर्ष तक दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति का गठन नही होने दिया और निगम के विकास कार्य ठप कर दिये उसके नेता अंकुश नारांग का बैठक व्यवस्थाओं पर सवाल उठाना हास्यास्पद ही नही अनैतिक भी है।
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने अंकुश नारंग के सोशल मीडिया पोस्ट पर जवाबी एक्स पोस्ट में कहा है की जिस पार्टी ने ढाई साल निगम स्थाई समिति का गठन नही होने दिया उसके नेता अंकुश नारांग का आज व्यवस्थाओं पर सवाल उठाना शर्मनाक है और एक पुरानी कहावत – “छज बोले तो बोले छलनी भी बोले जिसमे 72 छेंक” को भी चरितार्थ कर रही है।
कपूर ने कहा है की दिल्ली नगर निगम की स्थाई समिति बैठक हाल में स्थानाभाव के कारण आज पत्रकारों को बैठने की जगह नही मिल पाई जिसको लेकर स्थाई समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को उचित निर्देश दिये हैं पर अंकुश नारांग ने बिना स्थाई समिति अध्यक्ष से जानकारी लिए मनगढ़ंत कहानियां सुना डाली। भाजपा के लिए मीडिया लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण स्तम्भ है और हम पारदर्शी शासन में यकीन करते हैं।
कमेटी के लाइव प्रसारण में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि बैठक के दौरान आधी से ज्यादा कुर्सियां खाली रही। 12 जोन के उपायुक्त भी बैठक से नदारद रहे। ऐसे में जगह की कमी हुई तो कैसे? हालांकि स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष सत्या शर्मा ने इस अव्यवस्था के लिए माफी मांग ली।

