DelhiCivicAlerts
Municipal Corporation of Delhi (MCD)

दिल्ली नगर निगम में अध्यापक ट्रांसफर प्रणाली में भ्रष्टाचार के आरोप, पारदर्शिता पर उठे सवाल


दिल्ली नगर निगम (MCD) में अध्यापकों के ट्रांसफर सिस्टम को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल के समय में इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और पारदर्शिता की कमी के आरोप सामने आए हैं, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष देखा जा रहा है।


लगभग 12 वर्ष पहले तक एमसीडी में अध्यापकों के ट्रांसफर जोन स्तर पर किए जाते थे, जिससे शिक्षकों को उनके निवास के आसपास ही विद्यालय मिल जाता था। यह व्यवस्था काफी सरल और सुविधाजनक मानी जाती थी तथा इससे शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता था।


हालांकि कुछ शिकायतों के बाद ट्रांसफर की शक्तियां जोन से हटाकर मुख्यालय (हेड क्वार्टर) को सौंप दी गईं। इस बदलाव के कुछ समय बाद ही मुख्यालय स्तर पर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आने लगीं।


इन समस्याओं को दूर करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली शुरू की गई थी। इस पहल का शिक्षकों ने स्वागत किया क्योंकि इससे प्रक्रिया में निष्पक्षता आने की उम्मीद थी। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, मात्र एक वर्ष के भीतर इस ऑनलाइन प्रणाली को बिना स्पष्ट कारण के बंद कर दिया गया।


ऑनलाइन प्रणाली के बंद होने के बाद से फिर से भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में शिक्षकों को ट्रांसफर के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है और कुछ मामलों में ₹2,00,000 तक की रिश्वत मांगे जाने के आरोप हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया में उच्च अधिकारियों की संलिप्तता स्थिति को और गंभीर बना रही है।


विशेषज्ञों और शिक्षकों का मानना है कि यदि ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली में कोई तकनीकी या प्रशासनिक खामियां थीं, तो उन्हें दूर किया जा सकता था, न कि पूरी व्यवस्था को ही बंद किया जाता। आरोप है कि अतिरिक्त आयुक्त पंकज नरेश अग्रवाल पैसा उठाकर ट्रांसफर कर रहे हैं


अब शिक्षकों और समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा मांग की जा रही है कि दिल्ली नगर निगम एक पारदर्शी और सुदृढ़ ऑनलाइन ट्रांसफर प्रणाली को पुनः लागू करे, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे और शिक्षकों को न्याय मिल सके।


यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस सुधारों की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है।

(DelhiCivicAlert को भेजे गए आंतरिक मेल पर आधारित। हम पुष्टि नहीं करते)

Related posts

दिल्ली में अवैध यूनिपोल और धड़ल्ले से विज्ञापनों की भरमार, MCD में कौन दे रहा प्रोटेक्शन?

delhicivicalerts

हंगामे के बीच पारित हुआ MCD का बजट, विपक्ष ने की फ्लोर टेस्ट की मांग

delhicivicalerts

Illegal Construction: साउथ दिल्ली में निर्माणाधीन इमारत हादसे के बाद MCD का बड़ा फैसला — अब हर साइट पर होगा सर्वे

delhicivicalerts

Leave a Comment