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लैंड पूलिंग अटका, अवैध कॉलोनियां फली-फूली —कैसे फेल ही होता रहा DDA?

सत्य निकेतन इमारत हादसे में कुल 7 जानें चली गई। एजेसियों ने सस्पेंशन दिखाया पुलिस ने गिरफ्तारी और मीडिया ने ख़बर। लेकिन इस लेख के जरिए हमारी टीम ने तह में जाने की कोशिश की आखिर ऐसी अवैध इमारतों के बनने का असल गुनगहार कौन है? हम कोई फैसला नहीं सुना रहे बल्कि तथ्यों को आपके सामने रख रहे कि आपको पता लगे घटना का एक दूरगामी पहलू ये भी है।

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वर्षों से अपने मूल नियोजन कार्यों को दरकिनार कर खुद को एक बिल्डर एजेंसी में बदल लिया है। बिना किसी मांग आकलन या लोकेशन ऑडिट के लगातार फ्लैट निर्माण ने दिल्ली को अव्यवस्थित और असुरक्षित बना दिया है।दिल्ली में अनधिकृत निर्माण, असुरक्षित इमारतें और रुका हुआ नियोजित विकास डीडीए की प्रणालीगत विफलता का सीधा परिणाम है। एक अर्बन प्लानर ने कहा कि डीडीए के बिना बिकी इन्वेंट्री के निपटान और ऑडिट तक नए फ्लैट निर्माण पर रोक लगे। जनहित आवासों — छात्रावास, पीजी और ईडब्ल्यूएस किराये के आवास — पर प्राथमिकता दी जाए। लैंड पूलिंग नीति के कार्यान्वयन के लिए सख्त समय-सीमा तय की जाए।

1. मूल विफलता: नियोजन से हटकर फ्लैट निर्माण

  • खराब लोकेशन, घटिया गुणवत्ता, अत्यधिक कीमत और पुराने डिज़ाइन के कारण हजारों फ्लैट खाली पड़े हैं।
  • इस मृत इन्वेंट्री को बेचने के लिए बार-बार छूट और नीलामी योजनाएं लानी पड़ती हैं, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान होता है। यह स्पष्ट करता है कि डीडीए का ध्यान जनहित पर नहीं, बल्कि संस्था को व्यस्त रखने और स्वार्थ साधने पर है।

2. नीतिगत पक्षाघात

फ्लैट-केंद्रित दृष्टिकोण ने डीडीए के वैधानिक कर्तव्यों को ठप कर दिया है:

  • लैंड पूलिंग नीति 2018 में अधिसूचित हुई, लेकिन आज तक लागू नहीं हो सकी।
  • ग्रीन डेवलपमेंट एरिया, टीओडी नीति, हाई-डेंसिटी डेवलपमेंट केवल कागजों पर ही सीमित हैं। इससे दिल्ली में जमीन के दाम कृत्रिम रूप से दबे हुए हैं, जबकि मांग बहुत अधिक है।

3. जमीनी परिणाम: अनधिकृत निर्माण

नीतिगत शून्यता के कारण जमीन मालिकों के पास कोई वैध विकल्प नहीं बचता और वे अनधिकृत निर्माण करने को मजबूर होते हैं।

  • यह निर्माण जल्दबाज़ी में होता है ताकि एमसीडी, पुलिस, राजस्व विभाग और अन्य संस्थाओं की वसूली व्यवस्था से बचा जा सके।
  • नतीजा: कमजोर संरचनाएं और असुरक्षित कॉलोनियां। दिल्ली भर में कृषि भूमि पर बिना किसी मानक के अवैध प्लॉटिंग और कॉलोनियां तेजी से फैल रही हैं।

4. मानवीय कीमत

सत्य निकेतन, सैदुलाजाब और साकेत जैसी त्रासदियां इसी विफलता का परिणाम हैं। यदि डीडीए ने महंगे फ्लैटों की बजाय विनियमित पीजी आवास, छात्रावास और किफायती किराये के आवास बनाए होते, तो मासूम जानें बच सकती थीं।

5. एमपीडी-2047 में अतिक्रमण

डीडीए ने मसौदा एमपीडी-2047 में भवन स्वीकृति शक्तियों को अपने हाथ में लेने का प्रस्ताव रखा है, जबकि 74वें संशोधन के अनुसार यह अधिकार स्थानीय निकाय (एमसीडी) का है। यह केंद्रीकरण विकास को और धीमा करेगा और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा।

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