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शायरी की विरासत को सहेजने के लिए एमसीडी के विरासत प्रकोष्ठ की अनोखी पहल

दिल्ली नगर निगम की पहल: सांस्कृतिक धरोहर पर जागरूकता के लिए चांदनी चौक में उर्दू-फ़ारसी शायरी पर व्याख्यान

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के विरासत प्रकोष्ठ ने चांदनी चौक के ऐतिहासिक टाउन हॉल में “उर्दू और फ़ारसी शायरी: एक परिचय” विषय पर व्याख्यान आयोजित किया। इस आयोजन का उद्देश्य उर्दू और फ़ारसी शायरी के समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा करना था। कार्यक्रम में प्रतिष्ठित विद्वान और शायरी के उत्साही लोग एकत्र हुए।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. शरीफ हुसैन कासिमी और प्रो. अलीम अशरफ खान ने शायरी के विकास, उसकी प्रासंगिकता और हिंदी में इसके योगदान पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इन वक्ताओं ने उर्दू और फ़ारसी के बीच के जटिल संबंधों व भारत की सांस्कृतिक विरासत में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

एमसीडी के आयुक्त अश्विनी कुमार ने इस अवसर पर विशेष रूप से भाग लिया। उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के प्रोत्साहन की आवश्यकता को स्वीकारते हुए कार्यक्रम की प्रशंसा की। इसका महत्व इसलिए भी था कि यह विद्वानों से प्रत्यक्ष जुड़ने और उर्दू और फ़ारसी कविता की गहराई को समझने का विशेष अवसर प्रदान करता है।

एमसीडी का विरासत प्रकोष्ठ इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करके दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। शैक्षिक व्याख्यान, शेरो शायरी और अन्य पहल के माध्यम से, एमसीडी का लक्ष्य दिल्ली के समृद्ध इतिहास को संरक्षित करना है।

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