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…जब कमिश्नर के सामने DC ने कहा, ” पार्षद और मेरी कॉल डिटेल निकालिए, MCD में नेता बनाम अधिकारी

आम आदमी पार्टी शासित दिल्ली नगर निगम में जब अधिकारी और नेताओं के बीच अनबन होती थी उस वक्त कारण था दिल्ली में आम आदमी पार्टी का शासन होना और तालमेल का अभाव। वक्त और हालात बदले साल 2025 के विधानसभा चुनाव में न केवल बीजेपी ने दिल्ली में सरकार बनाई बल्कि निगम में ज्यादा सीट होने के बाद भी आम आदमी पार्टी को सत्ता से उखाड़ फेंका। दिल्ली नगर निगम के मेयर, स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष जैसे बड़े पदों पर बीजेपी ही सत्ता में है। हालांकि बीते दिन स्टैंडिंग कमेटी की मीटिंग के दौरान
कमेटी अध्यक्ष और कमिश्नर की मौजूदगी में ही डीसी और पार्षद के बीच बहस इतनी बढ़ गई की नौबत कॉल डिटेल निकलवाने तक आ गई। बाद में कमिश्नर ने मोर्चा संभाला।

क्यों डीसी ने कहा पार्षद की कॉल डिटेल निकालो

भाजपा पार्षद पंकज लूथरा ने कहा कि निगम अब बुजुर्ग के खिलाफ डेमोलिशन की कार्रवाई कर रहा है।
बुजुर्ग ने JE मोहित कालरा से बात की, तो उसने 3 लाख की मांग की।

बुजुर्ग ने 2 लाख देने की बात कही, जेई बोला —डीसी साहब (बादल कुमार) को भी हिस्सा देना होता है ।

पंकज लूथरा ने कहा मैंने JE के खिलाफ जब DC बादल कुमार को को कई बार फोन किये यह फोन उठाते ही नहीं हैं । JE मनमानी पर उतारू है। वो कहता है मेरी DC से सीधी सेटिंग है । उनको भी हिस्सा जाता है ।

तमाम आरोपों पर डीसी बादल ने
कहा — “यह आरोप सरासर गलत हैं, मेरा और पार्षद का फोन चेक कर लीजिए। अगर मैंने फोन नहीं उठाया, तो क्या इसका मतलब यह है कि मैं दोषी हूं?” इन्होंने मुझे सिर्फ एक बार फोन किया । इनका और मेरे फोन की कॉल डिटेल चेक की जाए।

हालांकि DC कहा “हो सकता है इन्हीं ( पंकज लूथरा,निगम पार्षद ) का भी इसमें शेयर हो।”

ये सुनना था कि स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष सत्य शर्मा ने डीसी ये कहकर रोका कि बादल को चुने हुए जनप्रतिनिधि से इस तरह बात नहीं कर सकते।

ये सब कुछ कमिश्नर अश्विनी कुमार की उपस्थिति में हो रहा था।
तभी वो बोल पड़े

“हमारा ऑफिसर सुनता रहेगा और आप उस पर गलत आरोप लगाते रहेंगे — ये नहीं चलेगा। अगर इज़्ज़त आपकी है, तो अधिकारी की भी है। ” अगर कोई प्रमाण है तो लाइए, लेकिन निराधार आरोप लगाए जाएं यह नहीं चलेगा । क्या चल रहा है यह सिर्फ ब्लैकमेलिंग और एक्सटॉर्शन-

“*Do not become tool in the hands of blackmailers
शर्म आनी चाहिए आपको,यह हो क्या रहा है । हम यहां काम करने आते हैं लफंगई करने नहीं ।

घटना के बाद अब क्या क्या हुआ?

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली बीजेपी के एक शीर्ष नेता ने भी लूथरा से कहा कि बिल्डिंग विभाग का मुद्दा क्यों उठाया?

कमिश्नर अश्विनी कुमार को लेकर कयासों का दौर चलने लगा है। एक धडा कहता है कि अगस्त के पहले या दूसरे हफ्ते में ट्रांसफर हो जाएगा। ये वो धडा है जो चाहता है कमिश्नर निगम में न रहें। दूसरा धडा का कहना है कि इस मुद्दे की जांच करवानी चाहिए। भरी सभा में बिना सुबूत डीसी पर इतना संगीन इल्जाम लगाया। कुछ बीजेपी के नेता पार्षद के सार्वजनिक ऐसे बोलने को अपरिपक्वता करार दे रहे। बहरहाल, सबकी नजर है ये मुद्दा सिर्फ चर्चा ए आम होगा या फिर कोई एक्शन भी।

आपको यह भी बता दें कि दिल्ली नगर निगम कमिश्नर की नियुक्ति सीधे गृह मंत्रालय के जरिए की जाती है और कमिश्नर 12 जोन के डीसी की ट्रांसफर पोस्टिंग करता है। यही वजह है कि अधिकारियों और चुने हुए जनप्रतिनिधियों के बीच इस तरह की घटना पहली नहीं है।

बादल और विवादों का पुराना है नाता

ISS Officer) बादल कुमार शाहदरा साउथ जोन के DC हैं। साल 2023 में कार्यकाल खत्म होने के बाद साल 2024 में एक्सटेंशन मिला जो अभी तक चल आ रहा है।

जब आप के शासन में बादल को हटाने प्रस्ताव हुआ पास

19 दिसंबर 2024 को एमसीडी के सदन की बैठक में बादल कुमार को हटाने का प्रस्ताव पारित हो गया बावजूद इसके MCD में काबिज हैं। उस समय बादल बीजेपी को भाए अब लूथरा प्रकरण के बाद फिर ये मुद्दा गरम हो गया।
क्या बादल कुमार को उनके कैडर में वापस भेजा जाएगा। ऐसा हो सकता है। पर ऐसा ही होगा इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।

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