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बचपन में मां से सीखने वाली भाषा(हिंदी)सबसे बढ़िया, MCD कार्यालयों में हो इस्तेमाल

14 सितंबर 1949 को हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्वीकार करने के साथ हर साल पूरे देश में हिन्दी दिवस और इसके बाद का सप्ताह राजभाषा सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।

दिल्ली नगर निगम में आयुक्त, अश्विनी कुमार ने हिन्दी भाषा का महत्व बताने वाला केंद्रीय गृह मंत्री का संदेश पढ़ा तो वहीं अतिरिक्त आयुक्त,
पंकज नरेश अग्रवाल ने दिल्ली के मुख्य सचिव का संदेश पढ़ा ताकि हिंदी को लेकर दिल्ली नगर निगम के कामकाज में हिंदी का बोलबाला रहे।

आयुक्त, अश्विनी कुमार ने अपने संदेश में कहा कि हमारी मातृभाषा हिन्दी केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को समझने का जरिया भी है। जिस भाषा को हम बचपन में अपनी माँ से सीखते हैं, उसी में भावनाओं की सबसे सहज और सजीव अभिव्यक्ति होती है। हिन्दी वह भाषा है जो पूरे देश को जोड़ने का कार्य कर सकती है। यदि हम अपने साहित्य और संस्कृति की गहराई को समझना चाहते हैं तो हमें हिन्दी का अध्ययन और प्रयोग प होगा कार्यालयो में हिन्दी का प्रयोग न केवल हमारी पहचान को सशक्त करता है बल्कि कामकाज को और सरल व आत्मीय भी बनाता है। इसलिए मैं सभी से आग्रह करता हूँ कि वे राजभाषा हिन्दी को अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में प्राथमिकता दें और इसके प्रचार-प्रसार में योगदान करें।

उपमहापौर, जयभगवान यादव ने कहा कि हिन्दी को कामकाज और व्यवहार की भाषा बनाना हमारी जिम्मेदारी है। हिन्दी हमारे देश की पहचान है। निगम के सभी अधिकारी और कर्मचारी अगर प्रशासनिक कार्यों में हिन्दी का प्रयोग करेंगे तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत होगा। हमें गर्व होना चाहिए कि हम हिन्दी जैसी सशक्त भाषा में अपने कार्य कर सकते हैं। राजभाषा सम्मान सप्ताह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि यह हमारे दायित्व की याद दिलाने का अवसर है कि हम सभी अपने कार्यालयी कार्यों में हिन्दी को प्राथमिकता दें और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

हिन्दी समिति की उपाध्यक्ष, नीला कुमारी ने इस अवसर पर कहा कि राजभाषा सम्मान सप्ताह–2025 के अंतर्गत आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रम हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और उसकी व्यावहारिक उपयोगिता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से रखे गए हैं। कार्यशाला, प्रतियोगिता और कवि सम्मेलन जैसे विविध आयोजन न केवल कर्मचारियों को हिन्दी के प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगे, बल्कि हिन्दी को कामकाज की भाषा के रूप में अपनाने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण साबित होंगे।

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