दिल्ली विधानसभा सचिवालय ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए सभी संबंधित विभागों को लोक लेखा समिति (PAC) की सिफारिशों पर 31 जुलाई 2026 तक Action Taken Report (ATR) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह निर्देश भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन’ पर की गई ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर जारी किया गया है।
विधानसभा सचिवालय ने स्पष्ट किया है कि यह रिपोर्ट 30 जून 2026 तक की प्रगति को दर्शाएगी और इसमें प्रत्येक सिफारिश पर की गई कार्रवाई, उसकी वर्तमान स्थिति और निर्धारित समय-सीमा का उल्लेख अनिवार्य होगा। यह कदम ऑडिट टिप्पणियों को व्यावहारिक प्रशासनिक कार्रवाई में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने इस पहल को सुशासन की दिशा में अहम बताते हुए कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना, सेवाओं की पहुंच बढ़ाना और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाओं की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना समय की मांग है। उन्होंने जोर दिया कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं केवल नीतियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हर नागरिक की गरिमा और कल्याण से जुड़ा विषय है।
इसी क्रम में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव को भी औपचारिक पत्र भेजकर समिति की सिफारिशों पर समयबद्ध और विस्तृत जवाब मांगा गया है। विधानसभा सचिवालय ने यह भी संकेत दिया कि एक व्यवस्थित फॉलो-अप तंत्र के जरिए इन सिफारिशों को तय समय सीमा के भीतर लागू कराया जाएगा।
अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य नीतियां समावेशी होनी चाहिए, ताकि न केवल दिल्लीवासियों बल्कि अन्य राज्यों से आने वाले लोगों को भी सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं मिल सकें। उन्होंने सार्वजनिक अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण, बीमा कवरेज के विस्तार और रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश को प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई।
इस पहल से उम्मीद है कि दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार होगा, जिससे नागरिकों को बेहतर और समान स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

