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निगम कर्मचारियों को मोदी रैली में भेजने वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग; LOP ने मेयर, कमिश्नर को लिखी चिट्ठी

रविवार, 17 अगस्त को दिल्ली के रोहिणी/नरेला इलाके में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के यूईआर-2 के उद्घाटन में एमसीडी कर्मियों की मौजूदगी को पहले तो आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने फेसबुक लाइव के जरिए बीजेपी शासित एमसीडी पर निशाना साधा। फेसबुक लाइव करने के बाद ‘‘आप’’ पार्षदों कुसुम लता, सारिका चौधरी, भगवीर और राकेश लोहिया ने भी मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग को लेकर जोन के डिप्टी कमिश्नर्स को पत्र लिखा है। वहीं रैली के अगले ही दिन एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने मेयर – निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर पूछा, किसके आदेश से कर्मचारियों को रैली में जबरन भेजा गया? रैली को को सफल दिखाने के लिए एमसीडी के विभिन्न जोन एवं वार्डों से सफाई कर्मचारियों, मलेरिया विभाग के कर्मियों, तथा निगम विद्यालयों के शिक्षकों को जबरन बुलाया गया। नारंग का दावा है कि कर्मचारियों को धमकी दी गई कि यदि वे रैली में नहीं आए , तो उनकी सेवा समाप्ति, वेतन रोकने, या अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कमिश्नर अश्विनी कुमार को लिखा गया पत्र

नेता प्रतिपक्ष यहीं नहीं रूके एमसीडी के मेयर राजा इकबाल सिंह से पूछा है कि किसके आदेश से कर्मचारियों को रैली में जबरन भेजा गया? बसों की व्यवस्था किसने की, बसों के व्यय का भुगतान किस मद से किया गया और क्या किसी राजनीतिक रैली में कर्मचारियों को भेजना उचित है? उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।

मेयर राजा इकबाल को लिखा गया पत्र

रविवार को इन कर्मचारियों का साप्ताहिक अवकाश होता है, फिर भी उन्हें जबरन बुलाकर, बसों द्वारा रैली स्थल तक पहुँचाया गया और कुछ मामलों में कॉम्पेन्सेटरी लीव देने का झांसा भी दिया गया।

पत्र में पूछे गए ये सवाल—

रैली के लिए कर्मचारियों को जबरन लाना किसके आदेश से किया गया?

रैली स्थल तक लाने के लिए बसों की व्यवस्था किस विभाग द्वारा की गई?

बसों के व्यय का भुगतान किस बजट मद से किया गया? क्या किसी राजनीतिक दल की रैली के लिए शासकीय कर्मचारियों को बाध्य करना उचित है?

अंकुश नारंग ने कहा ये कार्रवाई न केवल लोक सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सत्ता के दुरुपयोग का स्पष्ट उदाहरण है। यह कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों का भी हनन है। निष्पक्ष जांच करवाई जाए तथा दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। प्रमाण स्वरूप कुछ वार्डों के पार्षदों द्वारा किए गए फेसबुक लाइव वीडियो के लिंक तथा कर्मचारियों को दिए गए विभागीय आदेशों की प्रतिलिपियां भी संलग्न की।

—-टीम दिल्ली सिविक अलर्ट (DCA)—

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