वैसे तो दिल्ली नगर निगम ऐसी ख़बरों से भरा पड़ा है लेकिन ताज़ा मामले में दिल्ली नगर निगम के पूर्व सहायक अभियंता आरोपी विजय कुमार जैन को अदालत ने दोषी पाया है। आईपीसी की धारा 217 के तहत दोषी माना है। मामला अनधिकृत निर्माण से जुड़ा है। दरअसल, मामला जुलाई 2004 का है जब पश्चिमी पंजाबी बाग इलाके में 15 संपत्तियों के मालिकों पर अनधिकृत निर्माण के लिए मामला दर्ज किया गया था, तत्कालीन सहायक अभियंता जैन ने संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए फाइलें दबा ली। तब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मामला दर्ज किया था।
मामला राउज एवेन्यू कोर्ट का है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट निशांत गर्ग आरोपी विजय कुमार जैन के खिलाफ आरोपों की सुनवाई कर रहे थे।
अदालत ने पाया कि अभियुक्त वीके जैन ने जानबूझकर 15 फाइलें अपने पास रखीं, वो भी तब जब उनका डिमोलिशन किया जाना था। जैन ने संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने के लिए फाइलें अपने पास रखीं, जबकि उन्हें 11 अप्रैल, 2005 को उच्च न्यायालय के निर्देश की जानकारी थी, जिसमें उसने एमसीडी को इन संपत्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने और चार महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

