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पीएम-उदय से निराशा: 50 लाख का दावा, 40 हज़ार का हक़

नियमितीकरण के वादों और अधिनियम विस्तारों के बीच दिल्ली की 1731 कॉलोनियाँ अब भी स्थायी समाधान की राह देख रही हैं। पीएम-उदय से लेकर कांग्रेस और भाजपा की घोषणाओं तक, हर सरकार ने राहत का वादा किया—पर हक़ का प्रमाण पत्र आज भी लाखों घरों से दूर है।

शहरी मामलों के जानकार व एकीकृत दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगांई ने कहा है कि वर्ष 2019 से आरंभ पीएम-उदय, के माध्यम से अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों के स्वामित्व अधिकार के छल के प्रति निरुत्साहित रहने व डीडीए की विफलता के चलते पिछले सात वर्ष में मात्र 40,000 लोगों ने ही स्वामित्व लिया वह भी पार्टी के दबाव में भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने लिया। अब इसे नए रंग रुप में प्रस्तुत कर, डीडीए की जगह दिल्ली सरकार के भ्रष्ट राजस्व विभाग को दिया गया है। 1731 अनधिकृत कॉलोनी का नियमितीकरण करने के अपने एक और वादे से सरकार पलटी मार रही है।

वर्ष 1983 में केन्द्र सरकार द्वारा नियमन के लिए प्रस्तावित 607 अनधिकृत कॉलोनियों की सूची 1731 पहुंच गई है, दिसम्बर 1993 में मदन लाल खुराना नीत भाजपा सरकार ने 1071 कॉलोनियों के नियमितिकरण की प्रक्रिया शुरु की, अक्टूबर 2008 में तत्कालीन दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने के नाम पर छत्रसाल स्टेडियम में एक विशाल रैली का आयोजन कर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के हाथों अंतरिम (प्रोविजनल) प्रमाण पत्र वितरित कराए। 29 दिसम्बर 2014 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कैबिनेट ने कट-ऑफ डेट 31 मार्च 2002 से बढ़ा कर 1 जून 2014 तक बसी हुई दिल्ली की सभी अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने की घोषणा की थी लेकिन अनिधिकृत कालोनियों के निवासी नियमित होने की अधिसूचना का इंतजार करते रह गए। अनिधिकृत कालोनियों को नियमित करने की बजाए वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पूर्व 6 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार की आखिरी केंद्रीय कैबिनेट ने पीएम-उदय के नाम से स्वामित्व अधिकारों के नियमितीकरण के लिए कागज व धनराशि लेने की प्रक्रिया आरंभ कर दी। पहले भी 50 लाख लोगों के लाभान्वित होने का दावा कर मोदीजी को धन्यवाद देने की नौटंकी की गई परन्तु पिछले सात वर्ष में मात्र 40,000 लोगों ने ही स्वामित्व लिया वह भी पार्टी के दबाव में भाजपा कार्यकर्त्ताओं ने लिया।

ममगांई ने कहा कि 43 साल में एक भी अनधिकृत कॉलोनी नियमित नहीं हुई अलबत्ता यूपीए सरकार द्वारा वर्ष 2007 में 8 फरवरी 2007 तक निर्मित अवैध निर्माणों को एक वर्ष तक तोड़फोड़ रोकने संबंधी राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली(विशेष प्रावधान) अधिनियम को अधिसूचित किया गया जिसे तबसे वर्ष 2011 तक एक वर्ष और उसके उपरान्त तीन-तीन वर्ष के लिए इस अधिनियम को विस्तार दिया जाता रहा, अभी इसे 31 दिसम्बर 2026 तक विस्तार दिया गया है। पूर्ववर्त्ती यूपीए सरकार हो या वर्तमान एनडीए सरकार सभी अधिनियम विस्तार कर तोड़फोड़ की लटकी तलवार से अस्थायी राहत दिए जा रहे हैं पर स्थायी समाधान देने के प्रति कोई संजीदा नजर नहीं आता है।

—ख़बर यहीं तक

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